साँस की सुबास है।- ग़ज़ल
रात और खाब है।।
तख्त ताज आज का।
ऐश ओ विलास है।।
काम ये झकास है।।
जीत का प्रयास है।।
है तलाश लोग को।
चीज जरुर खास है।।
आधुनिक हुए भले।
दर्द ओ खटास है।।
सादगी मरी पड़ी।
चीखता संत्रास है।।
साधना कृष्ण
साँस की सुबास है।- ग़ज़ल साँस की सुबास है। रात और खाब है।। तख्त ताज आज का।ऐश ओ विलास है।। …
October 1, 2022
Zindagi Se Mujhe Gila Hi Nahi ज़िन्दगी से मुझे गिला ही नहीं रोग ऐसा लगा दवा ही नहीं क्या करूँ
October 1, 2022
Uthaane Ke Liye Toofaan Aaya Kahan Se Hai उठाने के लिए तूफ़ाँ आया कहाँ से है लुटाने के लिए रिश्वत
October 1, 2022
Wafa Ka Bil Chukaana Bhi Nahi Aata वफ़ा का बिल चुकाना भी नहीं आता ख़फ़ा से दिल लगाना भी नहीं
October 1, 2022
Haal Hai Dil Ka Jo Kya Batayen Tujhe हाल है दिल का जो क्या बताएँ तुझे शाम में भी फ़ना
October 1, 2022
Kisi Ka Gam Uthaana Haan Chunauti Hai किसी का ग़म उठाना हाँ चुनौती है किसी को अब हँसाना हाँ चुनौती
October 1, 2022
Dil Ke Samandar Ko Uthaane Ka Waqt Aaya Hai दिल के समंदर को उठाने का वक़्त आया है अपने मसाइल