धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
September 15, 2021
बेटी और दहेज बेटियां न जाने कब तक बिकती रहेंगी दहेज के बाजार में लोग बेटी को स्वीकार करते हैं
September 15, 2021
दिल परवाना (कविता) इश्क की गलियों से जो गुजरा दिवाना हो गया जब मिला कोई रूप प्यारा दिल परवाना हो
September 15, 2021
हे !नारायण पार लगा दो …!! रे ! रँगरेज मोरी चुनर रंग दे , धानीं चटख गुलाबी में ।
September 15, 2021
शान–ए– हिंद आन भी हैं तू मान भी हैं तू हिंदी तू हिंदुस्तान की जान हैं तू तेरी मीठे शब्दों
September 14, 2021
क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को रोक न पायी जो मुल्क के