धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
September 14, 2021
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September 14, 2021
इश्क़ में भी अब इंस्टालमेंट है इश्क़ में भी अब इंस्टालमेंट है आशिक़ी में भी रिटायरर्मेंट है । कितने मच्यौर
September 14, 2021
एक स्त्री की व्यथा पहली नजर में… बड़ा सभ्य और सुसंस्कृत नजर आया था वो इंसान, गाली-गलौज पर उतरा वो
September 14, 2021
रोया कबीरा समझ न पाए रोया कबीरा दीन दुखियों पर, गाया कबीरा मोहताजों पर , संदेश दिया साखी पढ़ कर
September 14, 2021
हिन्दी की महानता , हिन्द हमारी हिन्द की भाषा , हम इसके बासी हैं , मातृभूमि के चरणों में अर्पित,
September 14, 2021
हिन्दी दिवस पर गीतिका तकल्लुफ, बेशुमार हिंदी में जुवां है शानदार हिंदी में । हमने कब इश्क को लव कहा