धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
September 18, 2021
रंग ये ज़िन्दगी भी देखो,बड़ी अजीब सी है। अलग-अलग रंगो, से ये सजी हुई है। कुछ रंग है खुशियों के,
September 18, 2021
बाल कविता चिड़िया चूं – चूं चीं – चीं करती चिड़िया । सब के मन को भाती चिड़िया
September 18, 2021
बाल कविता टेलीविजन मैं हूँ बच्चों टेलीविजन । मेरा कोई नहीं है सीजन ।। मैं चलता रहता हरदम ।
September 18, 2021
खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान होगा खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान होगा ऊपर से जब कभी
September 18, 2021
बाल कविता रात रात हुई भई रात हुई । दिन हो गया ज्यूँ छुई मुई ।। रात हुई अंधेरा साथ लाई
September 15, 2021
टूटे हुए रिश्तों का एहसास कुछ टूटे हुए रिश्तों की भी हमेशा याद आती है रिश्ते तो खत्म हो चुके