शीर्षक-
जिंदगी का वादा
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा, कहीं धूप कहीं छाया, बस यही …
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
September 22, 2021
आभासी बेड़ियां पिंजरे का पंछी उससे बाहर निकलकर भी उड़ान भरने में हिचकिचाता है बहुत बार, वो दर-असल कैद है
September 22, 2021
हर्ज क्या है? भाषण से पेट भरने की कला सीख ली है हमनें, रोटी को गाली देनें की हिमाकत करने
September 22, 2021
बुरा मनाकर मत बैठो उस समय भले ही बुरा लगे जब हमारे बुजुर्ग डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर,
September 22, 2021
प्रेम पथिक एक प्रेम बचपन में हुआ था पुस्तकों से, जब भी खोला उन्हें पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास और कल्पना
September 22, 2021
दर्द कहां से पाया हूं ? तपन जीवन की कहती है ,अपना जो शेष जीवन है ,धरा पर जो सुरक्षित
September 22, 2021
देश का दुर्भाग्य कृषि के लिए नीतियां बनाने में कृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने में शिक्षक