शीर्षक-
जिंदगी का वादा
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा, कहीं धूप कहीं छाया, बस यही …
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
September 23, 2021
ठेकेदारों का विकास छोटा ठेकेदार पंचायत स्तर पर करता है प्रचार और समर्थन ‘दल विशेष’ का, बदले में पाता है
September 23, 2021
तलाश ज़िंदगी की क्या कुसूर मेरा था, बस अपने घर को छोड़ा था। पूरे हो सके ख़्वाब इन आँखों के,
September 23, 2021
भूल जानें की ताक़त रखते हैं …!! हर लम्हा गुज़रता है मेरा , दर्द के आग़ोश में । जख़्म
September 23, 2021
हमारी राहें अलग हैं अगर तुम चाहते हो, मैं न बोलूं गलत को ग़लत और सही को सही, बेजुबान बन
September 22, 2021
प्राण-प्रिय अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय केशों में आलोकित सांध्य मधुमय चिर- प्रफुल्लित कोमल किसलय दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय 1
September 22, 2021
मधुर संगीत वीणा का तेरी वीणा की मधुर ध्वनि, मां सदा भाव भर देती है, अंधकार भरे अंतर उर में,