शब्दों की चोट
उस खाई के विरुद्ध ।
कभी जुदा करती है ।
चिंगारी पैदा करती है।।
8800784868
शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी …
September 15, 2021
टूटे हुए रिश्तों का एहसास कुछ टूटे हुए रिश्तों की भी हमेशा याद आती है रिश्ते तो खत्म हो चुके
September 15, 2021
बेटी और दहेज बेटियां न जाने कब तक बिकती रहेंगी दहेज के बाजार में लोग बेटी को स्वीकार करते हैं
September 15, 2021
दिल परवाना (कविता) इश्क की गलियों से जो गुजरा दिवाना हो गया जब मिला कोई रूप प्यारा दिल परवाना हो
September 15, 2021
हे !नारायण पार लगा दो …!! रे ! रँगरेज मोरी चुनर रंग दे , धानीं चटख गुलाबी में ।
September 15, 2021
शान–ए– हिंद आन भी हैं तू मान भी हैं तू हिंदी तू हिंदुस्तान की जान हैं तू तेरी मीठे शब्दों
Nice poem