राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी
राजनीति भी अजीब है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी …
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कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां
भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान
March 25, 2022
कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने
गीत – गाँव का मेला- सिद्धार्थ गोरखपुरी
March 25, 2022
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गीत – इल्तिज़ा है मेरी – सिद्धार्थ गोरखपुरी
March 25, 2022
गीत – इल्तिज़ा है मेरी इल्तिजा है ये तुझसे मेरी ख्वाबों में न अब बात कररूबरू हो जा अब तूँ
सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी
March 25, 2022
सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता
नारी- डॉ. इन्दु कुमारी
March 25, 2022
नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने