Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी

कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ …


कविता -माँ का आँचल

माँ  का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी
माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने दे
बचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ ,बचपन में मुझको खो जाने दे
माँ!तुम्हारी ममता की छाँव तले
मैं अक्सर सोया करता था
जब तुम मुझे जगाती थी
मैं रह- रहकर रोया करता था
बचपन के धागे में फिरसे,ख़्वाबों को
अपने पिरो जाने दे
माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने दे
जीवन में जिम्मेदारियां अनेक
रह – रह कर उपजा करतीं हैं
कुछ मुझको रुसवा करतीं हैं
कुछ मुझको तनहा करतीं हैं
आँखें भारी लगतीं है माँ,आँचल को अपने भिगो जाने दे
माँ एक बार फिर से मुझको, आँचल ओढ़ के सो जाने दे
मन हल्का हो जाएगा मेरा
माँ तेरे प्रीत के छाँव तले
तेरे आँचल के छईयाँ में
दुःख दर्द सब भाग चले
मेरे माथे को तेरे आँचल से,बस कुछ देर संजो जाने दे
माँ एक बार फिर से मुझको, आँचल ओढ़ के सो जाने दे
तेरे प्रेम सा कोई प्रेम नहीं
नहीं इस जहान में दूजा है
माँ शब्दों से भले ही नहीं
पर मन से तुमको पूजा है
मुझे बचपन वाला प्रीत दे माँ,फिर मुझको मेरा हो जाने दे
माँ एक बार फिर से मुझको, आँचल ओढ़ के सो जाने दे

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

Dosharopan by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 दोषारोपण नसीब और भगवान ( चाहे होते हों या नहीं ) कोई बड़ा प्रयास करने में, संघर्ष के कष्टदायक दिनों

Hamare samaj ki bhedchal by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 हमारे समाज की भेड़चाल ज्यादातर अमीर और प्रभावशाली लोग अपनी धन-संपत्ति, ऐश्वर्य-विलासिता कामयाबी, सत्ता, मशहूरी के छिन जाने की आशंका

Kamkaji mahilaon ki trasdi by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 कामकाजी महिलाओं की त्रासदी कामकाजी महिलाएं   पिसती हैं प्रतिदिन  घर की जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच, घर के कामों को 

Sakaratmak urja by Anita Sharma

September 4, 2021

 सकारात्मक ऊर्जा* हे मानुष तू न हो निराश। कर्म पथ पर बढ़ता चल  राह कठिन एकाकी होगी पर दायित्व संभाले

Sathi hath badhana by Anita Sharma

September 4, 2021

 *साथी हाथ बढ़ाना* साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थका हारा हो, साथ साथ बढ़ना उसके। हाथों को थामे रखना अपनो

Anath tere bin by Indu kumari

September 4, 2021

 श्री कृष्ण जन्मोत्सव   अनाथ तेरे बिन  आधी रात को जन्म भये कारावास का खुले वज्र कपाट दैत्य प्रहरी सो गए 

Leave a Comment