Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

geet, Siddharth_Gorakhpuri

गीत साढ़े सोलह कदम/sadhe-solah-kadam

गीत साढ़े सोलह कदम न पूछ के किस – किस तरहा से मजबूर हूँअपनी रफ्तार से बस साढ़े सोलह कदम दूर …


गीत 
साढ़े सोलह कदम

न पूछ के किस – किस तरहा से मजबूर हूँ
अपनी रफ्तार से बस साढ़े सोलह कदम दूर हूँ
जिन्दगी मजबूर होना चाहती है! तो हो जाए
मैं तो वैसे ही एक अरसे से चकनाचूर हूँ
अपनी रफ्तार से बस साढ़े सोलह कदम दूर हूँ
कोशिश लाख की है वक्त ने के तोड़ डालूँ
मैं अब भी अड़ा हूँ, आदत से जो मजबूर हूँ
अपनी रफ्तार से बस साढ़े सोलह कदम दूर हूँ
न दिन में कोई सुकून है, न है चैन रातों में
हाँ… कभी – कभार परेशान हो जाता जरूर हूँ
अपनी रफ्तार से बस साढ़े सोलह कदम दूर हूँ
वक्त बदले या ना बदले ये उसकी मर्जी…
मैं खुद को बदल लूंगा, मैं खुद का ग़ुरूर हूँ
अपनी रफ्तार से बस साढ़े सोलह कदम दूर हूँ
न सुख से कोई वास्ता न दुख से कोई दिक्क़ते
तमाम लम्हा बीत गया मैं बन चुका गमरूर हूँ
अपनी रफ्तार से बस साढ़े सोलह कदम दूर हूँ

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 3, 2022

मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल

माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ

चाँद और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

चाँद और मैं अमावस की काली रातों मेंउलझी हुई कई बातों मेंन पूछ! किस तरहा रहते हैंचाँद और मैं एक

राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 15, 2022

 राजनीति भी अजीब  है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी

लघुकथा हैसियत और इज्जत- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 13, 2022

 लघुकथा – हैसियत और इज्जत एक दिन मंगरू पूरे परिवार के साथ बैठ के बात कर रहा था, चर्चा का

Leave a Comment