Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

geet, Siddharth_Gorakhpuri

गीत -समर्पण कर रहा हूँ- सिद्धार्थ गोरखपुरी

गीत -समर्पण कर रहा हूँ उसकी आँखों को अब खुद का दर्पण कर रहा हूँ फिर उसके सामने खुद का …


गीत -समर्पण कर रहा हूँ

गीत -समर्पण कर रहा हूँ- सिद्धार्थ गोरखपुरी
उसकी आँखों को अब खुद का दर्पण कर रहा हूँ

फिर उसके सामने खुद का समर्पण कर रहा हूँ
जब से खुद को देखा है
उसकी निगाह से
निगाह अब फिरती नहीं
कभी भी चाह के
उसके दिल के एक पद के लिए, मैं अभ्यर्थन कर रहा हूँ
फिर उसके सामने खुद का समर्पण कर रहा हूँ
न जाने कैसा जादू है
उसकी निगाह में
मैं डूब सा जाता हूँ
उस समंदर अथाह में
इसीलिए तो उसकी निगाहों का वर्णन कर रहा हूँ
फिर उसके सामने खुद का समर्पण कर रहा हूँ
इशारों में करती है बातें
और मौन अधर रह जाते हैं
हम टकटकी निगाह से देखते हैं
और उसके दिल तक बह जाते हैं
उसके दिल में भी उसका समर्थन
कर रहा हूँ
फिर उसके सामने खुद का समर्पण कर रहा हूँ

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 3, 2022

मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल

माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ

चाँद और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

चाँद और मैं अमावस की काली रातों मेंउलझी हुई कई बातों मेंन पूछ! किस तरहा रहते हैंचाँद और मैं एक

राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 15, 2022

 राजनीति भी अजीब  है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी

लघुकथा हैसियत और इज्जत- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 13, 2022

 लघुकथा – हैसियत और इज्जत एक दिन मंगरू पूरे परिवार के साथ बैठ के बात कर रहा था, चर्चा का

Leave a Comment