Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

कविता – शिव और सावन

कविता – शिव और सावन सावन शिव हुए अवतरित धरती परसावन में निज ससुराल गएहुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत …


कविता – शिव और सावन

सावन शिव हुए अवतरित धरती पर
सावन में निज ससुराल गए
हुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत
भाँग – धतूरे से मलामाल हुए

मान्यता है के सावन में
बाबा आते ससुराल
यश, कीर्ति, धन, वैभव से
भक्तों का रखते खयाल

तप घोर किया था सावन में
मार्कण्डेय ने जीता था यम को
शिव कृपा करें इस सावन में
आदमी साधे निज संयम को

समुद्र मंथन हुआ था सावन में
रत्नो में था हलाहल निकला
विश्व का कल्याण हुआ
जब महादेव ने गरल निगला

शिव स्वयं हैं जल कहता है ये
सदियों से शिव का पुराण
शिव की प्रकृति समझ गए तो
नहीं चाहिए कोई प्रमाण

सावन में ही विष्णु प्रभु
होते योगनिद्रा में लीन
फिर प्रकृति संचालक के पद पर
शिव होतें हैं आसीन

सावन में बाबा की कृपा
सबपर बरसे अपरम्पार
बाबा ऐसे ही करते रहें
सकल जन का हरदम उद्धार

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

musibat jab bhi aati hai by gaytri shukla

July 18, 2021

मुसीबत जब भी आती है मुसीबत जब भी आती हैबहुत कुछ कह के जाती है । रात कितनी अंधेरी होसमय

kavya Purvagrah by sudhir Srivastava

July 18, 2021

 पूर्वाग्रह हमने समझा जिसे साधू वो तो शैतान निकला, दुत्कारा था जिसे उस दिन बहुत इंसानरुपी वो तो भगवान निकला।

kavita balatkar written by rajesh

July 18, 2021

बलात्कार ज्येठ महीने की थी बात , भीषण गर्मी की थी रात।स्कूल हमारे बंद हुए थे,थक के हम भी चूर

swapn kavita by Arun kumar shukla

July 18, 2021

शीर्षक-स्वप्न लोग कहते जिंदगी का है सफर छोटा,जानकर के भी मगर मैं भूल जाता हूं।जिस समय मैं सोचता बेचैन रहता

Rishta apna by Dr hare Krishna Mishra

July 18, 2021

 रिश्ता अपना अर्धांगिनी उत्तराधिकारिनी , मेरे जीवन की कामिनी , बहती आई अंतस्थल में , पावन निर्मल गंगा जैसी  ।।

gazal by rinki singh sahiba

July 18, 2021

ग़ज़ल  सौ बार उससे लड़ के भी हर बार हारना, बाज़ी हो इश्क़ की तो मेरे यार हारना। उससे शिकस्त

Leave a Comment