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कविता – पर्यावरण| kavita -paryavaran

कविता – पर्यावरण पर्यावरण है प्रकृति का आख़र सूरज , चंदा, धरती और बादरप्रकृति का अद्भुत चहुँदिशि घेराचंदा डूबा फिर …


कविता – पर्यावरण

कविता - पर्यावरण| kavita -paryavaran
पर्यावरण है प्रकृति का आख़र

सूरज , चंदा, धरती और बादर
प्रकृति का अद्भुत चहुँदिशि घेरा
चंदा डूबा फिर हुआ सवेरा
कौन इन सबसे अनजाना होगा
पर्यावरण को सदा बचाना होगा

अंबर नीला, पीले खेत
कल – कल नदियाँ सुफ़ेद रेत
समंदर गहरा, ऊँचा पहाड़
लपटी लता और पेड़ -ए -ताड़
कौन इन सबसे अनजाना होगा
पर्यावरण को सदा बचाना होगा

जंगल -झाड़ी, सुंदर बयार
पतझड़ोपरांत बसंती बहार
बरसती बूँदे औ हल्के झोंके
मदमस्त पवन को थोड़ा रोके
कौन इन सबसे अनजाना होगा
पर्यावरण को सदा बचाना होगा

ताल -तलैया, नीम की छैयां
वन में मोर की ता – ता थईयां
प्रकृति का अनमोल उदाहरण
गाँव का घर और पर्यावरण
कौन इन सबसे अनजाना होगा
पर्यावरण को सदा बचाना होगा

कोयल की कुकू, गौरैया की चीं -चीं
प्रकृति ने दायरे की है रेखा खींची
गोधूलि बेला, रात और शाम
प्रकृति प्रदत्त का हर एक नाम
कौन इन सबसे अनजाना होगा
पर्यावरण को सदा बचाना होगा

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-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


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