शीर्षक-
जिंदगी का वादा
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा, कहीं धूप कहीं छाया, बस यही …
कहीं कम तो कहीं ज्यादा,
September 12, 2021
वक्त से बड़ा कोई शिक्षक नहीं बचपन से मां-बाप, बड़े बुजुर्गों ने सिखाए बहुत से सबक, कुछ याद रहे, कुछ
September 12, 2021
ऐसा समय आएगा जिस तरह से हर बात में घुस रही है राजनीति आजकल जल्द ही ऐसा दिन आ जाएगा,
September 12, 2021
शान्त तटस्थ तपस्वी सा हिमराज। शान्त तटस्थ तपस्वी सा हिमराज। श्वेत रजत अविराम विस्तारित। सुषमा सुशोभित शाश्वत स्निग्ध शान्त। ओजस्वी
September 12, 2021
विधा-पद्य वंदना गुरु चरणों में करती वंदना गुरु चरणों में करती नित-नित शीश झुकाती हूँ। हाथ जोड़कर प्रणाम करूँ हृदय
September 12, 2021
अंतर कहीं पर दुर्घटना कोई होने पर.. घायलों की सहायता के लिए जितनी संख्या में लोग हाथ बढ़ाते हैं और
September 12, 2021
शिक्षक दिवस विशेष कविता देश के गौरव-शिक्षक है -राधाकृष्णन हमारा देश सब देशों का