Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, satyawan_saurabh

Through social media, love or fitur rises from foreigners

बेगानों से सोशल मीडिया के जरिये परवान चढ़ता प्रेम या फितूर Through social media, love or fitur rises from foreigners …


बेगानों से सोशल मीडिया के जरिये परवान चढ़ता प्रेम या फितूर

Through social media, love or fitur rises from foreigners
Through social media, love or fitur rises from foreigners

इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर से सोशल मीडिया की सामाजिकता को लेकर बहस तेज कर दी है। हाल की दोनों घटनाओं को छोड़ भी दें तो देश में हजारों किस्से ऐसे हैं कि जिनमें सोशल मीडिया के जरिये लड़कियों से छल किया गया। उन्हें लूटा गया और उनकी हत्या तक कर दी गई। यह गहन शोध का विषय है। हमने आजतक इस विषय को गम्भीरता से नही लिया है। आजकल की पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर रही है। अंग प्रदर्शन, एशो-आराम, अवांछित स्वतंत्रता, आधुनिकता का दिखावा और अच्छे संस्कारो का अभाव और अनैतिकता और पैसे की प्रति अत्यधिक लगाव जैसी आदतें मुख्य कमजोरी बन गई है। संयुक्त परिवार की अवधारणा समाप्त होती जा रही है। लिहाज और शर्म की भावना लगभग खत्म हो गई है। वहीं वैवाहिक रिश्तों के दरकने को भारतीय समाज के लिये एक बड़ी चुनौती माना जाएगा। जो समाज में कई तरह की विकृतियों को जन्म दे सकता है। रिश्तों की पवित्रता को लेकर पश्चिमी जगत में जिस भारत की मिसाल दी जाती रही है आज वह ही रिश्तों के संक्रमण वाले दौर से गुजर रहा है।
डॉ सत्यवान सौरभ

अपने बच्चों को लेकर/छोड़कर चल देने वाले ये रिश्ते आखिर किस सुख की तलाश में भटक रहे हैं? क्या इस भटकन की कोई मंजिल है? नारी नारायणी मिथक पुरातन पड़ गया है। क्या हो गया चरित्र और नैतिकता को? मुझे ऐसा लगा पीढ़ी परिवर्तन है । क्या आदत की लाचार ये पीढ़ी, संस्कारहीन और भौतिक सुखों की लालसा से भरी हुई हैं, मृगमरीचिका बनी हुई हैं और इसी तलाश में मरेगी। वर्तमान में भारत पकिस्तान के साथ दुनिया में सुर्खियां बटोर रही दोनों ही औरतों ने पहले लव मैरिज की है, अब फिर इन्हे प्यार हो गया। न इन्हे मासूम बच्चों की परवाह है? ऐसे रिश्ते सिर्फ समाज को भटकाने का काम करते है। क्योंकि इनकी देखा-देखी और बातें आएंगी आगे। ये सब इसी को स्वतंत्रता कहते हैं। उन मासूम और बेगुनाह बच्चों पर क्या बीत रही होगी। मैं तो यही सोच सोच कर दुखी हो रहा हूं। पर वो दुखी नहीं कि 15 साल की बेटी कैसे दुनिया का सामना करेगी?

अभी पाकिस्तानी नागरिक सीमा गुलाम हैदर और भारत के सचिन की असामान्य प्रेम कहानी के उलझे तार सुलझे भी नहीं थे कि राजस्थान की अंजू और पाकिस्तानी प्रेमी नसरुल्ला की प्रेम कहानी के किस्से सुर्खियां बनने लगे। लेकिन इन हालिया प्रेम कहानियों में कई तरह के उलझे पेच भी हैं। एक तो ये रिश्ते अलग-अलग धर्मों के बीच पनपे हैं दूसरे इनमें परिवारों की कोई भूमिका नहीं रही है। अन्यथा विगत में रिश्तेदारों-पड़ोिसयों या कारोबारी संबंधों के जरिये ये प्रेम कहानियां सिरे चढ़ती रही हैं। हालिया दोनों प्रेम कहानियों में ये चीज एक जैसी है कि प्रेम सोशल मीडिया के जरिये परवान चढ़ा। हालांकि, पुरानी कहावत है कि प्रेम आंख मूंदकर होता है और उसमें तर्कों की कोई गुंजाइश नहीं होती। लेकिन हाल के दिनों में सैकड़ों ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिनमें सोशल मीडिया के जरिये रिश्ते गांठकर सेना, वायुसेना व नौसेना के अधिकारियों व कर्मचारियों को किसी सुंदरी के जरिये पाकिस्तान से जासूसी के लिये इस्तेमाल किया जाता रहा है।

यह गहन शोध का विषय है। हमने आजतक इस विषय को गम्भीरता से नही लिया है। आजकल की पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर रही है। अंग प्रदर्शन, एशो-आराम, अवांछित स्वतंत्रता, आधुनिकता का दिखावा और अच्छे संस्कारो का अभाव और अनैतिकता और पैसे की प्रति अत्यधिक लगाव जैसी आदतें मुख्य कमजोरी बन गई है। संयुक्त परिवार की अवधारणा समाप्त होती जा रही है। लिहाज और शर्म की भावना लगभग खत्म हो गई है।

कई बार ऐसा होता है, औरतें घर छोड़कर भाग जाती हैं। कभी अकेली ही तो कभी सहारे के लिए किसी के साथ, इसलिए नहीं कि उन्हें डराती हैं जिम्मेदारियां, उन्हें डराते हैं लोग और ले जाते हैं इस हद तक, कि तिनका-तिनका जोड़ा घर ही, उन्हें बेगाना लगने लगता है। बेगानी बस्ती से ज्यादा, वो घर जिसे बार-बार, उसे अपना बताया जाता है। जन्म लेने से मरने तक, जो कभी उसका होता ही नहीं, सास बनने तक सास का शासन, बहू के आने से पहले ही,घर झिन जाने का डर, उसे हर पल सताता है। जिस घर को उसे बार-बार उसका अपना बताया जाता है। इतना तो वह सह जाती है,पर जब गांठ बांधकर, हाथ थाम कर लाने वाला ही, कब पराया हो जाता है। गांठ खोलकर आलमारी में रख देता है, और हाथ पकड़कर, किसी और का हो लेता है, तब औरत, बेगानों को छोड़कर, बेगानी बस्ती की ओर निकल जाती है।

इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर से सोशल मीडिया की सामाजिकता को लेकर बहस तेज कर दी है। हाल की दोनों घटनाओं को छोड़ भी दें तो देश में हजारों किस्से ऐसे हैं कि जिनमें सोशल मीडिया के जरिये लड़कियों से छल किया गया। उन्हें लूटा गया और उनकी हत्या तक कर दी गई। एक परिपक्व व्यक्ति के लिये सोशल मीडिया के गहरे निहितार्थ हैं। लेकिन छोटी उम्र में बहकने को भटकाव ही कहा जायेगा। वहीं वैवाहिक रिश्तों के दरकने को भारतीय समाज के लिये एक बड़ी चुनौती माना जाएगा। जो समाज में कई तरह की विकृतियों को जन्म दे सकता है। रिश्तों की पवित्रता को लेकर पश्चिमी जगत में जिस भारत की मिसाल दी जाती रही है आज वह ही रिश्तों के संक्रमण वाले दौर से गुजर रहा है।

औरते तो रोज भागती हैं। पर उनके भागने में और बॉर्डर पार शादीशुदा औरत के भागने में बड़ा फर्क है। यह एक सामाजिक त्रासदी है। उच्छृंखलता नहीं। देश के लिए प्रेम त्यागा जा सकता है। प्रेम के लिए देश नहीं। ऐसे लोगों की चर्चा भी नहीं होनी चाहिए।क्या आज की कानून व्यवस्था से वह राजा-महाराजाओ और अंग्रेजों वाला कानून में फैसलों में देरी नहीं होना दंड प्रक्रिया के अंतर्गत तुरंत सजा देकर निस्तांतरण हो जाना आज के मुकाबले बेहतर लगता है। सामाजिक‌ खाप पंचायतों/पंचो-पटैलो/मुखियाओं का विरोध विरोध हुआ उन्हें रूढ़िवादी, गैर परंपरागत, अमानवीय,और घृणित मानसिकता घोषित कर उन्हें बंद कराने के लिए कानून में महिला उत्पीडन के आधे अधूरे दावो पर कानूनो में संशोधन किया तो विसंगतिपूर्ण कानून ने महिलाओ को स्वछंद-स्वतंत्रत होने के ऐसे पंख लगा दिए गये। ‌जिसके विकृत परिणाम स्वरूप ऐसे मामले लगातार सामने आते जा रहे हैं। बिना शादी-संबंध के लड़के-लड़की एक जगह रह रहे हैं। यह व्यवस्था सामाजिक संस्थानों और संस्कृति के धज्जियां उडाने के लिए कानून जो बनाएं है यह उसकी बदहाली का एक रूप है।

About author

Satyawan Saurabh

डॉo सत्यवान ‘सौरभ’
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045
facebook – https://www.facebook.com/saty.verma333
twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh


Related Posts

Lekh by kishan sanmukh das bhavnani

July 31, 2021

 सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो, जिंदगी भर आनंद पाओ- झूठ वह कर्ज़ है, क्षणिक सुख पाओ जिंदगी

janmdin jeevanyatra by Maynuddin Kohri

July 25, 2021

जन्मदिन —- जीवनयात्रा  आजादी के बाद के काले बादल छट जाने के बाद देश मे अमन चैन,गणतन्त्र भारत की सुखद

Guru govind dono khade kako lagu paye by jayshri birmi

July 23, 2021

गुरु गोविंद दोनो खड़े काको लागू पाए अपने देश में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा कहा गया है।

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma

July 23, 2021

नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि

OTT OVER THE TOP Entertainment ka naya platform

July 23, 2021

 ओटीटी (ओवर-द-टॉप):- एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मीडिया सेवा ऑनलाइन सामग्री प्रदाता है जो स्ट्रीमिंग मीडिया को एक स्टैंडअलोन

Lekh jeena jaruri ya jinda rahna by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 लेखजीना जरूरी या जिंदा रहना        शीर्षक देखकर चौंक गये न आप भी, थोड़ा स्वाभाविक भी है और

Leave a Comment