Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Satta ki lalsa by Jitendra Kabir

 सत्ता की लालसा बहुत से अस्पताल खोले और बहुत सी जिंदगियां बचाई, बहुत से एक्सप्रेस वे बनाए और रिकार्ड तोड़ …


 सत्ता की लालसा

Satta ki lalsa by Jitendra Kabir

बहुत से अस्पताल खोले

और बहुत सी जिंदगियां बचाई,

बहुत से एक्सप्रेस वे बनाए

और रिकार्ड तोड़ संख्या में

सड़कें बनवाई,

यात्रियों को सुविधाएं दी

और बहुत सी नई ट्रेनें चलाई,

अपराधियों को नहीं बख्शा

और उनको कानून की 

असली पावर दिखाई,

विकास के नये आयाम

किये स्थापित

और देश में खुशहाली लाई,

एक सरकार के मुखिया ने

अपनी सरकार की उपलब्धियां

कुछ इस तरह सारी गिनवाई,

लेकिन चुनावों के समय

फिर सत्ता में आने के लिए

उसने विभिन्न धर्मों के लोगों को

आपस में लड़ने लड़ाने की

अपनी पुरानी नीति पर ही आस्था जताई,

चुनावी तैयारियों के लिए

जातिगत समीकरणों को साधने में

अपनी विशेष रुचि दिखलाई

और इस तरह उसने अपने ही

चहुंमुखी विकास के दावे को 

दरकिनार करते हुए 

सत्ता में बने रहने की लालसा के प्रति

अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Bharat varsh by arun kumar shukla

June 27, 2021

 शीर्षक- भारत वर्ष मस्तक दिव्य हिमालय जिसका, पांव धुले नितसागर इसका। हृदय भाग में बहती है नित , गंगा यमुना

karm hi Ishwar by kamal siwani bihar

June 27, 2021

                      कर्म ही ईश्वर   क्या ईश्वर  मिलता  है  हमको ,

kavita Sandeh by sudhir srivastav

June 27, 2021

 संदेह संदेह के बादल एक बार घिर आये, तो सच मानिए कि फिर कभी न छंट पाये,  मान लिया छंट

bihadon ki bandook by priya gaud

June 27, 2021

 “बीहड़ों की बंदूक” बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें दागी जाती हैं गोलियां उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर

Rajdaar dariya by priya gaud

June 27, 2021

 राज़दार दरिया दरिया  सबकी मुलाकातों की गवाह रहती है कुछ पूरी तो कुछ अधूरी किस्सों की राजदार रहती है आँखे

sawam ki rachyita by priya gaud

June 27, 2021

 “स्वयं की रचयिता” तुम्हारी घुटती हुई आत्मा का शोर कही कैद न हो जाये उलाहनों के शोर में इसलिए चीखों

Leave a Comment