Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Roya kabira smajh na paya by Dr. Hare krishna Mishra

 रोया कबीरा समझ न पाए रोया कबीरा दीन दुखियों पर, गाया कबीरा मोहताजों पर , संदेश दिया साखी पढ़ कर …


 रोया कबीरा समझ न पाए

Roya kabira smajh na paya by Dr. Hare krishna Mishra

रोया कबीरा दीन दुखियों पर,

गाया कबीरा मोहताजों पर ,

संदेश दिया साखी पढ़ कर ,

तीखा बोला पाखंडों पर   ।।

हम समझ न पाए कबीरा को,

निराकार जो उनका अपना ,

दर्शन उनका जीवन मेरा ,

तत्व बताया बड़े ज्ञान का   ।।

रहस्यवाद पर कबीरा का ,

अनुभव उनका अपना था,

हम पाखंडी बने रहे , पर,

पढ़ा नहीं कभी-कबीरा को  ।।

ज्ञानी ध्यानी को जाने पर ,

नींद हमारी  खुलती है ,

हो जाती जब देर बहुत ,

हम उस पर पछताते हैं  ।।

कह गए कबीर सुनो साधु,

दुनिया नहीं ठौर ठिकाना है,

बार-बार कहता आया हूं ,

जीवन पानी का बुलबुला  ।।

वसुंधरा हरी भरी,

मरुधरा कैसे बनी,?

प्रयास तेरे पास है ,

चुनौती स्वीकार कर ।।

कबीर और रैदास को ,

एक साथ  झांक तू  ,

ज्ञान का भंडार जो,

परवाह किसको आज है ?

दिशा और दशा से ,

बहुत दूर आज हैं ,

साफ-साफ दिख रहा,

अंधकार मेरे पास है  ।।

रोया कबीरा समझ न पाए,

गंगा तट पर क्यों पछताए ,

उनका दर्शन उनका जीवन,

आओ मिलकर हम अपनाएं। ।।

गुरु भाई दोनों मिले ,

संत कबीर रैदास ,

मां गंगा प्रसन्न हुई,

अपने तट पर आप। ।।

गूंज उठा गंगा तट एक पल,

प्रभु जी तुम चंदन हम पानी ,

भक्तों में थी होड़ लगी ,

भजन करे रैदासा ,,,,,

                       “

                      ” प्रभु जी तुम चंदन हम पानी”

मौलिक रचना

                   डॉ हरे कृष्ण मिश्र
                   बोकारो स्टील सिटी
                   झारखंड ।


Related Posts

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान।

August 30, 2022

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान। यह कैसा शब्द है कन्यादान, कौन करता है अपनी जिंदगी को दान,माता- पिता की जान से बढ़कर,कैसे

हां मैं हूं नारीवादी!

August 28, 2022

हां मैं हूं नारीवादी! नारीवाद के प्रमुख प्रकार, स्‍त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार,ऐसा विश्‍वास या सिद्घांत,भेदभाव का हो देहांत,और

खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता

August 28, 2022

कविता: खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता  कभी

कब प्रशस्त होगी हर नारी

August 25, 2022

“कब प्रशस्त होगी हर नारी” अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ

वजह-बेवजह रूठना

August 25, 2022

वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के

कविता -शहर

August 22, 2022

शहर गांवों के सपने  संभाल लेता है शहर  हो जाओ दूर कितना भी पास बुला लेता है शहर । गांवों

PreviousNext

Leave a Comment