Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Arvind_kalma, lekh

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma

नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि …


नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma
भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि मुस्लिम शासक महिलाओं को देखकर उन्हें उठा ले जाते थे,धीरे-धीरे ये प्रथाएं बन गई। भारत के अधिकांश ग्रामीण अंचलों में घूंघट प्रथा का प्रचलन आज भी जोरों शोरों से चल रहा है। पुरुष वर्ग भी महिलाओं को घूंघट में रखना पसन्द करता है उन्हें घर की चारदीवारी में रहने के लिए मजबूर करता है। भारतीय संविधान बनाकर डॉ.भीमराव अम्बेडकर ने घूंघट जैसी कुप्रथा से महिलाओं को आजादी दिलाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण अंचल की महिलाएं अपने अधिकारों को नही जानती, इसलिए वो इस प्रथा को ढो रही हैं। घूंघट नहीं करने वाली शहरी महिलाओं को वो फूहड़ समझती है मगर ऐसा नही है,महिलाओं को भी खुलकर सांस लेने की आजादी होनी चाहिए उनका अधिकार है। क्या उनका चेहरा इतना बुरा होता है जो किसी को दिखा नही सकती, क्यों न चाहते हुए भी उन्हें मजबूर किया जाता है? उनकी पशुत्व जिंदगी को इंसानी जिंदगी में तब्दील क्यों नहीं किया जाता? यह एक तरह की गुलामी ही होती है।

जहाँ-जहाँ नारी शक्ति ने संविधान में प्रदत्त अपने अधिकारों को जाना है उन महिलाओं ने जरूर अपने हक के लिए आवाज उठाई है एवं इस कुप्रथा को बन्द करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जब संविधान ने सबको आजादी से जीने का अधिकार दे रखा है तो क्यों महिलाएं घूंघट को अपना सम्मान समझती है? क्यों अपने चेहरे को ढकती है? विदेशी नारियों में भारतीय नारी की अपेक्षा खुलकर जीने की आजादी है ठीक वैसे ही भारत में भी है लेकिन केवल संविधान के पन्नों पर। धरातल पर अमल करने वाले सीमित लोग हैं जो नारी को हर प्रकार की आजादी देते हैं।

राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में घूंघट प्रथा बहुतायत में प्रचलित है जोधपुर सम्भाग के जालोर, सिरोही, जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर और पाली जिलों में ना तो कोई घूंघट प्रथा के खिलाफ बोलता है और ना ही बन्द करवाने का मुद्दा उठाता है। मात्र कुछ लोग आवाज़ उठा भी ले तो समाज के अन्य ठेकेदारों द्वारा उन पर लांछन लगाया जाता है उन्हें घूंघट का विरोध करने से रोका जाता है क्योंकि उन्हें औरतों को गुलाम बनाकर काम करवाना पसन्द है। आये दिन आलेख, कविताओं और कहानियों में नारी समानता की बात करते हैं पुरुषों के बराबर हक देने की बात करते हैं, पर अधिकांश क्षेत्रों में नारी गुलामी के प्रतीक घूंघट प्रथा पर किसी का ध्यान नहीं जाता। ना कोई इस पर खुलकर बात करता है। ताज्जुब की बात तो ये है कि घूंघट को महिलाएं खुद अपना सम्मान मानती है। जब उन्हें कहा जाता है कि घूंघट एक प्रकार से आपकी गुलामी को दर्शाता है न कि सम्मान। फिर भी वो इसी बात पर अड़ी रहती हैं कि नहीं हम बिना घूंघट कैसे रह सकती हैं। सास-ससुर,जेठ और बड़े बुजुर्गों के सामने घूंघट नहीं निकालेंगी तो हमारी इज्जत का क्या होगा? अब उन्हें कौन समझाये कि ये उनकी प्रगति में बाधा है। माना कि बहुत सी स्त्रियां इसे शौक समझती है या अपना सम्मान मानती है लेकिन कई स्त्रियां इस तरह के दंश को झेलकर अंदर ही अंदर घुटती रहती है ना समाज में खुलकर बोल सकती है ना इसका विरोध कर सकती है। कई सालों से उन पर यह प्रथा इस तरह से मढ़ दी गयी है जिसके तले वे आज तक दबी है उन्हें बाहर निकालना मुश्किल हो रहा है। लेकिन इस दुनिया में कोई भी काम नामुमकिन नहीं है सब मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे तो सबकुछ मुमकिन है।

हमें भारतीय संविधान में प्रदत्त अधिकारों से नर नारी को अवगत करवाना चाहिए उन्हें खुलकर बोलने और पहनने की आजादी देनी चाहिए। जितनी शोषण की जिंदगी नारी जीती है उतनी पुरुष जिए तो कैसा रहेगा? कोरोना काल में मास्क पहनने पर भी पुरुष वर्ग कतराने लगा है वो कहता है कि दम घुटने लगा है तो सोचो उन नारियों पर क्या बीतती होगी जिन्हें आप हरपल घूंघट में रखते हैं। हमें जरूरत है संविधान में दिए गए अधिकारों से सबको अवगत करवाने की और उन्हें अमल में लाने की। सबको समानता से जीने का हक है कोई किसी का गुलाम नहीं। करोड़ों महिलाओं को आजादी देने वाले महामानव डॉ.भीमराव अम्बेडकर अकेले इतना सबकुछ कर सकते हैं तो हम सभी संगठित होकर इस कार्य को सफलता की ओर ले जा सकते हैं। हम निस्वार्थ होकर घूंघट प्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं तो इससे निजात पा सकते हैं और नारी शक्ति को खुलकर जीने की आजादी दिला सकते हैं। 

स्वरचित एवं मौलिक आलेख
अरविन्द कालमा
गाँव – भादरुणा, पोस्ट – भादरूणा,
तहसील – साँचोर, जिला – जालोर
(राजस्थान)
पिन कोड – 343041


Related Posts

Let’s fulfill our commitment by conserving water

November 8, 2022

जल ही अमृत है, जल ही औषधि है आओ जल संरक्षण कर अपनी प्रतिबद्धता निभाएं जीवन को प्रभावित करने वाले

प्रकृति और वायु प्रदूषण/Nature and air pollution

November 8, 2022

प्रकृति और वायु प्रदूषण/Nature and air pollution वायु की गुणवत्ता एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गई है क्योंकि प्रदूषक फेफड़ों

वैश्विक नेतृत्व/Global leadership

November 8, 2022

वैश्विक नेतृत्व/Global leadership  भारत के वैश्विक मंचों पर नेतृत्व की भूमिका निभाने कदम बढ़े भारत 1 दिसंबर 2022 से जी-20

गुरु नानक देव का 553 वां जयंती महोत्सव 8 नवंबर 2022 पर विशेष

November 8, 2022

गुरु नानक देव का 553 वां जयंती महोत्सव 8 नवंबर 2022 पर विशेष जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल

विवाह/mariage

November 5, 2022

विवाह बहुत दिनों बाद अपनी सखी के घर गई थी मैं,बेटी की शादी की बधाई भी देनी थी और मौसीजी

शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग

November 5, 2022

लापरवाही शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग स्थाई सुशासन लाने का मूलमंत्र

Leave a Comment