Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

musibat jab bhi aati hai by gaytri shukla

मुसीबत जब भी आती है मुसीबत जब भी आती हैबहुत कुछ कह के जाती है । रात कितनी अंधेरी होसमय …


मुसीबत जब भी आती है

musibat jab bhi aati hai by gaytri shukla

मुसीबत जब भी आती है
बहुत कुछ कह के जाती है ।

रात कितनी अंधेरी हो
समय पर बीत ही जाती है
बात कितनी भी गहरी हो
समय पर ही समझ आती है ।

सुना है मौत भी आती है
तो दस्तक देकर आती है
मगर इन्सान को कब
इसकी आहट समझ आती है ।

संकट की घड़ी भी
यूं न एकाएक आई है ,
हम इन्सानों के कर्मों की ही
तो सजा सुना रही है ।

सुनो मौन प्रकृति का
यह चित्कार करती है
कि अब इस हाल में रहना ही
तुम इन्सानों की नियति है ।

कमाने को वो दो रोटी
होकर मजबूर निकला था
खनक पैसों की मजदूरों को
शहर तक खींच लाती है ।

शहर भी गाँव बन गया है
काम सब बंद पड़ गया है,
भूख जब कहर ढाती है
तो घर की याद आती है ।

रूठकर अपनों से जो
नई दुनिया बनाई थी,
उन्ही अपनों की दुआएं
असर तुमपर दिखाती हैं ।

दया और दान ही अब
सबसे बड़ा धर्म रह गया है
मानवता रखो जिंदा
विपत्ति आजमाती है।

वक्त कैसा भी मुश्किल हो
कि पल -पल बीत जाता है
रखो मुस्कान को जिन्दा
क्यों चेहरे पर उदासी है ।

मुसीबत जब भी आती है
बहुत कुछ कहकर जाती है ।

गायत्री शुक्ला
रायपुर (छ.ग )


Related Posts

इन्सानियत के पक्ष में- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

इन्सानियत के पक्ष मे क्या तुम सीखना चाहते होखुद कई दिन भूखे रहकरअनाज की कीमत समझना? खुद पर कोई जुल्म

अश्रु- जयश्री बिरमी

January 15, 2022

अश्रु बहते है अश्क ही आंखो के द्वार सेखुशी हो तो भी बहेंगे येगम में तो बहने का दस्तूर ही

हालात- जयश्री बिरमी

January 15, 2022

हालात मिलाना हाथ मुश्किल हैं बहुतगले लगाने की बात ही न कीजिएघूमने की ख्वाहिश बहुत हैंमगर बाहर निकलने की बात

एक अभिशाप- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

एक अभिशाप एक तरफ हैं…घर में बेटी के जन्म लेने परमायूस होने वाले लोग,लेकिन बेटे के जन्म परपूरे गांव, रिश्तेदारी

शेखियां बघारने का मौसम- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 15, 2022

शेखियां बघारने का मौसम चुनाव आ गये हैं और अब… देश को तरक्की की राह परले जाएगा कोई,तो कोई यहां

स्वामी विवेकानन्द – डॉ. इन्दु कुमारी

January 15, 2022

स्वामी विवेकानन्द युवाओं के प्रेरणा स्रौत शांति के संवाहक संतदेशभक्त समाज हितैषीलक्ष्य पाकर न रुके कदम भारतीयों के आदर्श हैंआध्यात्मिक

Leave a Comment