Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Maa ki sharan by Dr. indu kumari

 विजयादशमी के शुभ अवसर पर  माँ की शरण  मैया तू ही सहारा है विघ्न -बाधा हरती है। आते जो तेरे …


 विजयादशमी के शुभ अवसर पर
  माँ की शरण 

Maa ki sharan by Dr. indu kumari

मैया तू ही सहारा है

विघ्न -बाधा हरती है।

आते जो तेरे द्वा र

क्लेश दूर हो जाता है।

विजय मिलती है सदा

अधर्म पर धर्मों  की

मुझे भक्ति वर दो माँ

करूं सदा तेरी पूजा

कोई आन  नहीं दूजा

तेरी शरण में ही रहुं

कृपा बरसाना  माँ

प्रतिकार करूं मैं भी

अत्याचारियों की माँ

मिटेगी  माया भ्रम

स्वरूप की दीदार करूं

जब  तेरी शरण गहूं।

              डॉ.इन्दु कुमारी

मधेपुरा पत्रकार संघ


Related Posts

Aadarsh pesh karte mananeye by Jitendra Kabeer

August 22, 2021

 आदर्श पेश करते माननीय जब देश की संसद में होती है धक्का-मुक्की, हाथापाई, मार-कुटाई, आए दिन सरेआम, तो आम जनता

Azadi kish liye chahi thi humne by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 आजादी किस लिए चाही थी हमनें हम भारतीयों के साथ भेदभाव करते थे अंग्रेज खुद को कुलीन मानकर, नीचा दिखाते

Inshaniyat ki ummid by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 इंसानियत की उम्मीद कितने लोग हैं… जो सड़क पर पड़े पत्थर नजर आने पर उन्हें उठाकर एक तरफ कर देते

Vo hai Taliban by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 वो है तालिबान जो चाहता है… कि उसकी इच्छा के अनुसार ही दुनिया के सब लोग चलें, उसके तय किए

Ek mulk mar diya hai by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 एक मुल्क मार दिया है लोकतंत्र के ध्वज-वाहक बने थे जो उन सबने अपना पल्ला झाड़ लिया है, जीत हमारी

Jivan me aajadi by Anita Sharma

August 21, 2021

 जीवन में आजादी यूँ तो आजादी सभी का स्वप्न है। पर दायित्व में सभी बंधे हुए। है संसार कर्तव्यो के

Leave a Comment