Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, sudhir_srivastava

kavya – gaon ki galiyan by sudhir shrivastav

गाँव की गलियां समयचक्र औरआधुनिकता की भेंटचढ़ गईं हमारे गाँव की गलियां,लगता ऐसे जैसे कुछ खो सा गया है,अपनापन गलियों …


गाँव की गलियां

Village Street of India
समयचक्र और
आधुनिकता की भेंट
चढ़ गईं हमारे गाँव की गलियां,
लगता ऐसे जैसे कुछ खो सा गया है,
अपनापन गलियों में भी
जैसे नहीं रह गया है।
धूल,मिट्टी और कीचड़ भरी गलियों में
अजीब सी कशिश थी,
कंक्रीट के साथ जैसे
वो कशिश, अपनेपन की खुशबू भी
जैसे दफन हो गई है।
अब तो गाँवों की गलियों में भी
बच्चों का शोर ,हुड़दंग और
आपस का द्वंद्व ,शरारतें
गुल्ली डंडा और कंचे खेलना,
अंजान शख्स के दिखते ही
कुत्तों का भौंकना,
खूंटे से बंधे जानवर का
रस्सी तोड़कर गलियों में
सरपट भागना,
गलियों के मुहाने पर जगह
उन्हें पकड़ने के लिए
लोगों का मुस्तैद हो जाना ।
बड़े बुजुर्गों के डर से
गली में चुपचाप छुप जाना,
चाचा,दादी,बड़ी मां के पीछे
गली गली घूमकर
छुपते छुपाते घर में घुस जाना
जैसे जंग जीतने की खुशी का
अहसास करना
सब इतिहास हो गया,
गलियों का भी तो अब जैसे
केंचुल उतर गया।
गलियां भी अब वो गलियां
नहीं रह गई,
जहाँ घुसते ही जैसे
सुरक्षा और सुकून का ही नहीं
अपनों के बीच पहुंच जाने का
अहसास होता था,
अब सब कुछ बिखर सा गया है
गाँवों की गलियों को जैसे
आधुनिकता का भूत चढ़ गया है,
आज तो गाँव की गलियों में भी
बहुत भेद हो गया है,
इंसानी फितूर अब जैसे
गलियों को भी चढ़ गया है।

About author

 

Sudhir Shrivastava

सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा, उ.प्र.

Related Posts

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

21 वीं सदी की नारी! उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉपकरो परीक्षा की तैयारी,कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटोअपने घर की

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन ! कोई कोई तहजीब, सलीका, अदब नहीं खोता,सर झुकाता हुआ हर शख्स बेचारा नहीं होता!

मिट्टी का कर्ज- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 मिट्टी का कर्ज खूबसूरत है नजारालग रहा है प्यारा इस मिट्टी का कर्ज हैचुकाना हमारा फर्ज  है प्यारे गगन हमें

साहिल- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 साहिल ओ मेरे मन के मीत दिल लिया क्यों जीत निश्छल है मेरी प्रीत रेजीवन की है ये रीत सदा

आह्वान- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

आह्वान मद्यपान निषेध मेरे देश के नौजवानोंतू है मौजों की रवानीहै भारत माँ के लाल वेशकीमती तेरी जवानीमद्यपान नहीं जिन्दगानीबीड़ी

देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद विभूति सादगी के किया सुशोभित देशऱत्न प्रथम राष्ट्रपति के ऊँचे पद मुस्कान भरी मुखमंडल परअंकुरित न हो सके

Leave a Comment