Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kavitayein likhta hun by Siddharth gorakhpuri

कविताएँ लिखता हूँ   सुविधा भी लिखता हूँ और दुबिधाएँ लिखता हूँ। मैं सबके जीवन की अनेकानेक,  विधाएं लिखता हूँ। लिखना …


कविताएँ लिखता हूँ 

Kavitayein likhta hun by Siddharth gorakhpuri

 सुविधा भी लिखता हूँ और दुबिधाएँ लिखता हूँ।

मैं सबके जीवन की अनेकानेक,  विधाएं लिखता हूँ।

लिखना है कर्म धर्म मेरा बस इतना सा है ज्ञान मुझे,

मैं हिंदी कुल का कवि हूँ ,बस कविताएं लिखता हूँ।

महिमाण्डन झूठा करना ,कवियों का है धर्म नही।

जो ऐसा करते रहते है ,उनको कविता का मर्म नहीं।

जीवन के कठिन डगर में भी ,संभावनाएं लिखता हूँ।

मैं हिंदी कुल का कवि हूँ ,बस कविताएं लिखता हूँ।

कविताएँ मन को सृजित करतीं ,जब आगे बढ़ती जाती है।

कविता मुखर जब होती है ,तो छाती चौड़ी हो जाती है।

जीवन के बुरे दौर में  भी ,  आशाएं लिखता हूँ।

मैं हिंदी कुल का कवि हूँ ,बस कविताएं लिखता हूँ।

घायल हो चुके सत्य की ,सही सलामत पाँव है कविता।

तथ्यों का पेड़ ,सत्य की छाया और स्नेहिल छाँव है कविता।

मानव के अंदर की सारी बाधाएँ 

लिखता हूँ।

मैं हिंदी कुल का कवि हूँ ,बस कविताएं लिखता हूँ।

सही रस्ते पर चले मुसाफिर बस इतनी सी चाह मुझे।

मेरी कविता पढ़कर जीवन सुधरे ,नही चाहिए वाह मुझे।

कविता में भी पिता, बहन, भाई  व माताएं लिखता हूँ।

मैं हिंदी कुल का कवि हूँ ,बस कविताएं लिखता हूँ।

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

Sakaratmak urja by Anita Sharma

September 4, 2021

 सकारात्मक ऊर्जा* हे मानुष तू न हो निराश। कर्म पथ पर बढ़ता चल  राह कठिन एकाकी होगी पर दायित्व संभाले

Sathi hath badhana by Anita Sharma

September 4, 2021

 *साथी हाथ बढ़ाना* साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थका हारा हो, साथ साथ बढ़ना उसके। हाथों को थामे रखना अपनो

Anath tere bin by Indu kumari

September 4, 2021

 श्री कृष्ण जन्मोत्सव   अनाथ तेरे बिन  आधी रात को जन्म भये कारावास का खुले वज्र कपाट दैत्य प्रहरी सो गए 

Sikhane ki koshish by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करें अपने बच्चों को खाना बनाना भी पढ़ाई के साथ-साथ, वरना  लाखों के

Nishkam karm by Anita Sharma

September 4, 2021

 निष्काम कर्म हम कर्म करें निषकर्म भाव से। हो सेवा निष्कर्म भावों की। न अपेक्षा रखे किसी से। न उपेक्षित

Barsaat ki ek rat by Anita Sharma

September 4, 2021

बरसात की एक रात   इक रात अमावस की थी,         बरसता था पानी। रह-रह कर दामिनी

Leave a Comment