kavita- pacchim disha ka lamba intjaar by mahesh keshari
पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार.. मंझली काकी और सब कामों के तरह ही करतीं हैं, नहाने का काम और बैठ …
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dharti saja den by dr indu kumari
June 27, 2021
धरती सजा दें आएं हम सब मिलकर धरती को यूं सजा दें। पेड़ों की कतारें लगा दें इस अवनि को
geet sawan barse sakhi by dr indu kumari
June 27, 2021
गीत – सावन बरसे सखी बरसे रे सखी रिमझिम पनिया चमकै रे सखी मेघ में बिजुरिया। छमकत रे सखी गांव
kavita Mukti by virendra pradhan
June 27, 2021
मुक्ति किसी डांट-डपट से बेपरवाह हो मन चाहता है खेलना मनमफिक़ खेल जो बन्धे न हों बहुत अनुशासन मेँ परे
Chor chhipa baitha hai man me by dr hare krishna mishra
June 27, 2021
चोर छिपा बैठा है मन में चोर छिपा बैठा है मन में मैं ढूंढ रहा हूं दूसरे तन में, कैसी
Samvedna viheen hm dr hare krishna mishra
June 27, 2021
संवेदना विहीन हम संवेदना विहीन हम बांट पाय दर्द कौन। अनाथ तो बना गया, प्रकृति भी मौन क्यों ? दर्द
Hamare Sanskar by sudhir srivastav
June 27, 2021
हमारे संस्कार माना कि आधुनिकता का मुलम्मा हम पर चढ़ गया है, हमनें सम्मान करना जैसे भुला सा दिया है।
