Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita- niruttar anand kumar

 कविता:निरुत्तर निरुत्तर होकर भी, उत्तर खोज लो तुमप्रश्न में समस्या का हल खोज लो तुम। शान्त होकर सिर्फ प्रसन्न रहो, …


 कविता:निरुत्तर

kavita- niruttar anand kumar


निरुत्तर होकर भी, उत्तर खोज लो तुम
प्रश्न में समस्या का हल खोज लो तुम।


शान्त होकर सिर्फ प्रसन्न रहो,
मन के वन में तपोवन खोज लो तुम।

जितना है उतना बहुत है,
झोपड़ी में भी महल खोज लो तुम।

दुख-सुख से रँगा है जीवन,
बेरंग दुनिया में इंद्रधनुष खोज लो तुम।

बिन प्रतिज्ञा व्यर्थ है जीना,
जन्म-जन्मांतर की कसम खोज लो तुम। 

अनंत सुख नही तनिक खुशी,
अदृश्य स्वप्न के दृश्य खोज लो तुम।

युद्ध है,करो साहस असीमित
हे अर्जुन!रणभूमि में कृष्ण खोज लो तुम।

✍️आनन्द कुमार।
                          

जीवन परिचय

नाम: आनन्द कुमार
जन्मतिथि:दो सितम्बर उन्नीस सौ अस्सी
सत जोसफ कालेज प्रयागराज से आई एस सी (12th) किया, इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी काम, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से MA(अर्थशास्त्र) व बी एड किया। कुछ समय के लिए बालाजी टेलीफिल्म्स मुम्बई में ‘कहानी घर घर की’ टी वी सीरियल में काम करने का मौका मिला पर कामयाब नही हुए। इस वक़्त सहायक अध्यापक पद पर उच्च प्राथमिक विद्यालय चायल कौशाम्बी में कार्यरत है। 

Related Posts

Kavita thoda sa chintan by Jitendra kabir

July 3, 2021

 थोड़ा सा चिंतन बहुत बातें हो गई हों अगर पैट्रोल के दाम पैंतीस रुपए पर लाने की, तो थोड़ा सा

Kavita koi aashcharya nhi hai by Jitendra kabir

July 3, 2021

 कोई आश्चर्य नहीं है मौका मिलने पर हममें से ज्यादातर लोग हो सकते हैं ठग, चोर, झूठे और बेईमान, तो

kavita aise apradh se hm bachte hai by vinod kumar

July 3, 2021

.कविता-ऐसे अपराध से हम बचते हैं हम इंसानों ने मंदिर बनाने में पैसा लगाया हम इंसानों ने मस्जिद बनाने में

gazal by krishna kant kamil prayagraj

July 3, 2021

ग़ज़ल ️ लिक्खा या बिन लिक्खा पढ़नाजो भी पढ़ना अच्छा पढ़ना ग़र मंज़िल तक जाना है तोसबसे पहले रस्ता पढ़ना

kavit-yaaden by narayan laal new delhi

July 3, 2021

यादें यादों को दिल में बसाए रखना,दिल के करीने में सजाए रखना.यादें बड़ी अनमोल हुआ करती हैं,हीरे-मोती हैं इसको बचाए

gazal tulsi by pradeep shrivastav

July 3, 2021

ग़ज़ल तुलसी  तुलसी,पीपल तेरे आँगन में लगाना है मुझे ।अबकी इस तरहा मुहब्बत को निभाना है मुझे।। अब न आँखों

Leave a Comment