Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, poem

kavita kitni lahren baki hai by anita sharma

“कितनी लहरें बाकी हैं” कितनी लहरें अभी बाकी हैं,कितनी लहरें आकर जा चुकी । कितने बवंडर उठे यहाँ ,कितने रिश्तों …


“कितनी लहरें बाकी हैं”

kavita kitni lahren baki hai
कितनी लहरें अभी बाकी हैं,
कितनी लहरें आकर जा चुकी ।

कितने बवंडर उठे यहाँ ,
कितने रिश्तों को निगल गये।

कितनों ने अपनों को खोया है,
कितने सैलाब थम से गये।

कितनी पीड़ा को सहते हैं,
कितनी बातों को याद करें।

कितनी विपदाओं को झेला है,
कितनी विपदा अभी बाकी हैं।

कितने प्रश्न उठते मन में,
कितने बवंडर अभी बाकी हैं।

About author 

—अनिता शर्मा झाँसी
—-स्वरचित रचना—–


Related Posts

Jhutha bhram by Jitendra Kabir

November 7, 2021

 झूठा भ्रम रोक नहीं पाते जब तुम  दुनिया के सब मजलूमों  पर होने वाले ज़ुल्म-ओ-सितम  तो फिर तुम्हारे ‘दुखहर्ता’ होने

Ek vyang nasha by Anita Sharma

November 7, 2021

 एक व्यंग्य नशा सबका मनोरंजन करते अभिनेता पर अपने घर में समय न देते। धन तो खूब कमा लेते पर

Pyar bhara Geet by Anita Sharma

November 7, 2021

 प्यार भरा गीत एक प्यार का गीत सुना दो, बंसी की मधुर तान सुना दो। मोहन गोपियों संग राधा अकु

Raunak laut aae by Anita Sharma

November 7, 2021

 रौनक लौट आई लम्बे अरसे के बाद सही पर……रौनक लौट रही। सज रहे बाजार  बहुत समय के बाद । घरों

Chunav ka mausam by Anita Sharma

November 7, 2021

 चुनाव का मौसम लो चुनाव का समय आया छीटा कशी व्यंग्य का दौर। * सबको अपनी कुर्सी का मोह चुनाव

Deep sang Noor damka by Anita Sharma

November 7, 2021

 दीप संग नूर दमका  दीपो संग चेहरे पर नूर दमका है। कहीं सजना का प्यार छलका है । उनकी नजरों

Leave a Comment