Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kavita kaisa dharm tumhara by kamal siwani

 कैसा धर्म तुम्हारा ? कहाँ से तूने अपनाए , जीवन का अजब पहाड़ा ? एक दूजे में भेद तू करते, …


 कैसा धर्म तुम्हारा ?

Kavita kaisa dharm tumhara by kamal siwani


कहाँ से तूने अपनाए , जीवन का अजब पहाड़ा ?
एक दूजे में भेद तू करते, कैसा धर्म तुम्हारा ?

ऊँच–नीच भाव पूरित हो , रखते मन में खाई ।
द्वेष- जलन की कुटिल कटारी , है तेरी अनुयायी ।।

जहाँ विश्व परिवार ये शिक्षा , हमें पढ़ाई जाती ।
वहाँ तू सिमटे खुद में रहते , केवल अपनी जाति ।।

उससे आगे हित और का , तुमको नहीं सुहाता ।
इसीलिए ना भूल किसी से, रखते दिल का नाता ।।

औरों का रोना ना तेरे , उर को द्वेलित करता ।
तभी तो तू ना कभी भी बनते , उनके दुख का हर्ता ।।

उल्टे उनकी करुण चीख पर , तुम हो जश्न मनाते ।
लगता जैसे तीनों लोक का , सुख तू स्वर्गिक पाते।।

दिल पे हाथ ना धरकर सोचते , सबका ही मंगल हो ।
सुखमय जीवन होवे सबका , कहीं नहीं दंगल हो ।।

सबके जीने में ही होगा , जीवन सुखमय अपना ।
इसीलिए हो धर्म ये अपना ,सबके हित का सपना ।।

सबके हर्षित रहने में ही , हर्ष का अनुभव होगा ।
वरना किसी के रोने पे , अपना हित कब होगा ?

जाति – धर्म से ऊपर उठकर , व्यापक हित में सोचें ।
बहते अश्रु जहाँ भी देखें , जितना हो जा पोंछें ।।

भूख – प्यास है परम सच्चाई , सब में ही तो होती ।
जिससे व्याकुल होकर के , हर कोई आत्मा रोती ।।

केवल अपनी ही क्षुधा की , पीड़ा हम ना जानें ।
बल्कि और जनों के तड़पन , को भी तो पहचानें ।।

यही धर्म हम मानव का है , इससे कोई न दूजा ।
सच पूछो तो अखिल जगत में , यही है सच्ची पूजा।।
— — कमल सीवानी ,रामगढ़ ,सीवान ,बिहार


Related Posts

Aadarsh pesh karte mananeye by Jitendra Kabeer

August 22, 2021

 आदर्श पेश करते माननीय जब देश की संसद में होती है धक्का-मुक्की, हाथापाई, मार-कुटाई, आए दिन सरेआम, तो आम जनता

Azadi kish liye chahi thi humne by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 आजादी किस लिए चाही थी हमनें हम भारतीयों के साथ भेदभाव करते थे अंग्रेज खुद को कुलीन मानकर, नीचा दिखाते

Inshaniyat ki ummid by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 इंसानियत की उम्मीद कितने लोग हैं… जो सड़क पर पड़े पत्थर नजर आने पर उन्हें उठाकर एक तरफ कर देते

Vo hai Taliban by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 वो है तालिबान जो चाहता है… कि उसकी इच्छा के अनुसार ही दुनिया के सब लोग चलें, उसके तय किए

Ek mulk mar diya hai by Jitendra Kabeer

August 21, 2021

 एक मुल्क मार दिया है लोकतंत्र के ध्वज-वाहक बने थे जो उन सबने अपना पल्ला झाड़ लिया है, जीत हमारी

Jivan me aajadi by Anita Sharma

August 21, 2021

 जीवन में आजादी यूँ तो आजादी सभी का स्वप्न है। पर दायित्व में सभी बंधे हुए। है संसार कर्तव्यो के

Leave a Comment