कहॉं चले गये तुम
खत से निकल कर
बेवफाई का हमने नजारा जो देखा
मोहब्बत की कैसी हालत कर गये
कहॉं चले गये तुम खत से निकल कर बेजान खत मेरे पास रह गये शब्दों से तुमको सजाया था वही …
खत से निकल कर
August 4, 2021
शीर्षक- दोस्ती खरीदी जा सकती दुनिया की हर चीज पर दोस्ती नहीं भूलायी जा सकती जिन्दगी की हर चीज पर
August 4, 2021
अगर ऐसा हो पाए छू पाऊं अपने शब्दों से किसी के मन को, तो मेरा लिखना सफल है। जगा पाऊं
August 4, 2021
कविता : पानी…. रफ्ता रफ्ता रफ्ता कम हो रहा है पानी कुएं में, बाबड़ी में कावड़ और कावड़ी में नदियों
August 3, 2021
कविता मेंरा श्रृंगार करो आज मैं सूनसान सड़क को निहार रहा थापांच मंजिला इमारत के छत पर खड़े हो करइसलिए
August 3, 2021
अभी -अभी कारवां गुजरेगा अरे! अभी – अभी चौराहे की सड़कें जाम होगी नहीं पता क्यों? कारवां गुज़रेगा सरकार की
August 3, 2021
दोस्ती का रंग अपनी कमजोरियों पर शर्म, बड़े-बुजुर्गों का लिहाज, समाज में बदनामी के भय और अपने करीबियों के बीच