kavita is dhara par aurat by mahesh kumar keshri
कविता.. इस धरा पर औरतें.. हम, हमेशा खटते मजदूरों की तरह, लेकिन, कभी मजदूरी नहीं पातीं .. !! और, आजीवन …
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उड़ान – डॉ. इन्दु कुमारी
January 6, 2022
उड़ान हम पंछी है धरा अंबर केसपनों की हम भरे उड़ान स्वच्छंद हो विचरण करूंहै हमें परिधि का ज्ञान जुड़ी
बेनाम- डॉ इंदु कुमारी
January 6, 2022
बेनाम अन्दर की अच्छाईझलक दे ही जाती है समुद्र की गहराई कोछुपाई नहीं जाती है समझने वाले न होपीड़ा बताई
कामना- डॉ इंदु कुमारी
January 6, 2022
कामना फूलों के शहर होप्रेम मय डगर होस्वच्छ नगर होखुशियों के घर मेंएकता माहौल हो समता के गीत सेखुशनुमा संगीत
मित्रता – डॉ इंदु कुमारी
January 6, 2022
मित्रता सर्वोपरि सब रिश्तों मेंकीमत न लेते किस्तों में सार शब्द है मित्रता केसार्थक पहलू है रिश्तों के ईश्वर स्वरुप
सीखें हम बुजुर्गों का सम्मान करना- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 6, 2022
सीखें हम बुजुर्गों का सम्मान करना हर बात सही नहीं हो सकती किसी की कभी भीलेकिन जो हमारे लिए सही
चलो निकालें सप्ताह में एक दिन- डॉ. माध्वी बोरसे!
December 27, 2021
चलो निकालें सप्ताह में एक दिन! चलो निकालें सप्ताह में एक दिन, जिसमें खुद का साथ हो,बस खुद से बात
