Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kavita do kandhe mil jate hai by chanchal krishnavanshi

कविता -दो कन्धे तो मिल जाते हैं यहां मुझे दो कन्धे तो मिल जाते हैं यहां मुझे, रोने के बादमानता …


कविता -दो कन्धे तो मिल जाते हैं यहां मुझे

kavita do kandhe mil jate hai by chanchal krishnavanshi
दो कन्धे तो मिल जाते हैं यहां मुझे, रोने के बाद
मानता हूं कि तुम नहीं रोओगे,मुझे खोने के बाद।

मेरी खुशकिस्मती से अभी,वाकिफ कहां हो तुम
मेरी मां परेशान हो जाती है,मेरे दूर होने के बाद।

ज़ालिम दुनियां तेरे दर्द का तमाशा ही बनायेगी
इस बेरहम दुनियां के सारे ही बोझ ढोने के बाद।

मुफलिसी में जीना भी तो एक गुनाह है ‘चंचल’
वक्त भूल जाते हैं लोग क्यों अमीर होने के बाद।

About author

चंचल कृष्णवंशी 

Related Posts

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

PreviousNext

Leave a Comment