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Bhaskar datta, poem

Kavita :आत्मायें मरा नहीं करती

आत्मायें मरा नहीं करती आत्मायें मरा नहीं करतीमैंने बचपन में सुना थाकिसी नायाब मुख से वे जिंदा रहती हैंअपने खेतों- …


आत्मायें मरा नहीं करती

Kavita :आत्मायें मरा नहीं करती

आत्मायें मरा नहीं करती
मैंने बचपन में सुना था
किसी नायाब मुख से
वे जिंदा रहती हैं
अपने खेतों- खलिहानों में
एक नन्हें पौधे की तरह
पर आज ?
आज आत्मायें ही नहीं हैं,
तो जीवन का प्रश्न कैसा ?
वे मर चुकी हैं वैसे
जैसे नीत्शे ने कहा था
ईश्वर के लिए!!!

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भास्कर दत्त शुक्ल  बीएचयू, वाराणसी
भास्कर दत्त शुक्ल
 बीएचयू, वाराणसी


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