अपना कश्मीर और मधुकवि
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मधुकवि राकेश मधुर
अपना कश्मीर और मधुकवि अब तो सोए हुए भारती जाग जा|| देखले अपने भारत की क्या है दशा|| आज हिन्सा …
मधुकवि राकेश मधुर
September 4, 2021
सकारात्मक ऊर्जा* हे मानुष तू न हो निराश। कर्म पथ पर बढ़ता चल राह कठिन एकाकी होगी पर दायित्व संभाले
September 4, 2021
*साथी हाथ बढ़ाना* साथी हाथ बढ़ाना, एक अकेला थका हारा हो, साथ साथ बढ़ना उसके। हाथों को थामे रखना अपनो
September 4, 2021
श्री कृष्ण जन्मोत्सव अनाथ तेरे बिन आधी रात को जन्म भये कारावास का खुले वज्र कपाट दैत्य प्रहरी सो गए
September 4, 2021
सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करें अपने बच्चों को खाना बनाना भी पढ़ाई के साथ-साथ, वरना लाखों के
September 4, 2021
निष्काम कर्म हम कर्म करें निषकर्म भाव से। हो सेवा निष्कर्म भावों की। न अपेक्षा रखे किसी से। न उपेक्षित
September 4, 2021
बरसात की एक रात इक रात अमावस की थी, बरसता था पानी। रह-रह कर दामिनी