Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

hasya vyngya yog aur yog diwas by sudhir

 हास्य व्यंग्ययोग और योग दिवस आखिरकारयोग दिवस भी आ गया।चलिए हम सब मिलकरआज फिर दुनियां को दिखाते हैं,योग दिवस की …


 हास्य व्यंग्य
योग और योग दिवस

hasya vyngya yog aur yog diwas by sudhir




आखिरकार
योग दिवस भी आ गया।
चलिए हम सब मिलकर
आज फिर दुनियां को दिखाते हैं,
योग दिवस की भी
औपचारिकता निभाते हैं।
सोशल मीडिया पर
बड़ी धूमधाम से मनाते हैं,
बधाइयां की औपचारिकता निभाते हैं,
योग करते हुए फोटो खिंचाते हैं
सोशल मीडिया में
खूब प्रचारित करते हैं,
सरकारी, सामाजिक संगठन भी
नेता,सांसद, विधायक, मंत्री भी तो
बस!एक ही दिन
योग करते पाये जाते हैं,
इतने ही भर से
मीडिया और समर्थकों में
बड़ा कवरेज़ जो पा जाते हैं।
दरअसल दिवस मनाना भी
मात्र छलावा है,
असली मकसद तो बस
आमजन को बेवकूफ बनाना है,
आखिर प्रचार भी तो
इसी तरह से पाना है।
हम भी तो कुछ कम नहीं हैं
हमें लगता है जैसे
हमारी सबको बड़ी फिक्र है,
पर सच्चाई यह है
किसी को किसी की नहीं पड़ी है।
अरे भाई सिर्फ़ हम ही नहीं
हम ,आप सब भी तो
मुगालते में लड्डू खा रहे हैं।
हमें तो अपनी कम
औरों की पड़ी है,
अब आपको भला कौन समझाये
हम योग करें, निरोग हो जायें
बहुत अच्छा है,
मगर आपने कभी सोचा भी है
हम सब बीमार ही नहीं होंगे तो
बड़े बड़े अस्पताल
दवाई दुकानदार और उनके कर्मचारी
सरकारी और गैर सरकारी डाक्टर
गली मोहल्लों में फैले
प्रशिक्षित, अप्रशिक्षित डाक्टर,
दवा की फैक्ट्री और
उसमें काम करने वाले लोगों
सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय
और उनमें जीविका पाये
लाखों लोगों ही नहीं और भी
परोक्ष, अपरोक्ष बहुतेरे लोगों के
घर के खर्च भला कैसे चल पायेंगे?
ऊपर से बड़ी समस्या यह भी तो है
अगले सालों में हम भला
योग और योग दिवस का
महत्व कैसे बता पायेंगे,
योग दिवस भी भला तब
इतने ही उत्साह से कैसे मनायेंगे?
आखिर तब हम योग दिवस की
औपचारिकता कैसे निभा पायेंगे?
करो योग, रहो निरोग
कैसे और किसको बतायेंगे?
तब क्या हम योग के महात्म्य का
उपहास नहीं उड़ायेंगे?
◆ सुधीर श्रीवास्तव
      गोण्डा, उ.प्र.
   8115285921
©मौलिक, स्वरचित

Related Posts

Gazal hum tumhare hue tum hamare hue by antima singh

July 23, 2021

शीर्षक- हम तुम्हारे हुए, तुम हमारे हुए दिल की दरिया को दिल में उतारे हुए,हम तुम्हारे हुए तुम हमारे हुए।

Anant path by madhushri maharashtra

July 23, 2021

अनंत पथ ओ पथिक अनंत पथ केछोड़ उठ चल कुछ न अपनाजो भी था तेरा नहीउद्भ्रांत जग का था सपनाअब

idhar awaze bahut hai by prem prakash uttrakhand

July 23, 2021

इधर आवाजें बहुत हैं ——- चलते-फिरतेउठते-बैठतेखाते-पीतेसोते-जागतेअंदर-बाहरऊपर-नीचेइधर-उधरशायद बसासत है इन्सान रहते होंगे। क्यों…?आवाजें नही होतीखग,परिन्दोंकीट-पतंगोपेड़-पौधोंफल-फूलोंजानवरों की।या नही होती हैंगिरते झरने, बहती

Mahesh Keshari ki kavitayen

July 23, 2021

कविताएं (1) कविता..  तहरीर में पिता..  ये कैसे लोग हैं ..??  जो एक दूधमुंही नवजात बच्ची के मौत को नाटक

Desh prem by Sudhir Srivastava

July 23, 2021

 देशप्रेम आज हम सब को एक साथ आना होगा मिलकर ये सौगंध सभी को लेना होगा, देशप्रेम का चढ़ रहा

Ann ki barbadi rokne ka sabak by jitendra kabir

July 23, 2021

 अन्न की बर्बादी रोकने का सबक देखता हूं जब-जब मैं अपने घर के बच्चों को  आवश्यकता से अधिक भोजन लेकर

Leave a Comment