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geet, poem

Geet by mainudeen kohari

 गीत गीत गाए जा.. गुनगुनाए जा… हो सके तो…हो सके तो… मजलूम का दिल बहलाए जा …! गीत गाए जा …


 गीत

Geet by mainudeen  kohari

गीत गाए जा..

गुनगुनाए जा…

हो सके तो…हो सके तो…

मजलूम का दिल बहलाए जा …!

गीत गाए जा … 

राहों में कांटे भी आएंगे

उनसे न घबराना …

हो सके तो … हो सके तो …

काँटों को भी सहलाए जा …!

गीत  गाए जा…. 

पर सेवा भी उपकार है

जीवन का इसमें सार है

हो सके तो…हो सके तो …

नर सेवा में जीवन लगाए जा …!

गीत गाए जा … 

काम-क्रोध-लोभ को तज दे

सुख से जीवन जीना है तो

हो सके तो … हो सके तो …

हंसी-खुशी से जीवन जीए जा …  !

गीत गाए जा … 

ऐ ” नाचीज” तू भी अब सोच ले…

इस दुनियां से इक़ दिन जाना है…

हो सके तो … हो सके तो  …

मन-वचन-कर्म से अच्छा कुछ किए जा … !!! 

गीत गाए जा…गुनगुनाए जा

हो सके तो …हो सके तो ……!

^^^^^^^^^^^^^^^^^

मईनुदीन कोहरी “नाचीज़ बीकानेरी”


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