Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Dekha hai maine by komal Mishra`koyal

  देखा है मैंने देखा है मैंने घरों में,कैद होती आवाजें, गुम होती खुशियाँ,उदास होते चेहरे।  पीले पड़ते होंठ, दम …


  देखा है मैंने

Dekha hai maine by komal Mishra`koyal

देखा है मैंने घरों में,कैद होती आवाजें,

गुम होती खुशियाँ,उदास होते चेहरे। 

पीले पड़ते होंठ, दम तोड़ती उम्मीदें।। 

सब कुछ तो देखा है ,और समझा भी है जरा-जरा। 

अपनी माँ की आँखों से,कोई कतरा गिरा-गिरा।। 

छीन कर हाथों से किताबें,चूड़ियाँ पहनाई जाती हैं, 

मतलब भी ना समझे पर,शादियां कराई जाती हैं।। 

रिवाज के नाम पर, बेड़ियाँ पहनाई जाती हैं। 

अना कि खातिर औरतें, बलि चढाई जाती हैं।। 

बुझा कर दीपक अंधेरे में, हर बार सताई जाती हैं। 

पर खोल दे गर ज़ुबाँ कभी तो, बेहया कहलाती हैं।।

                            नाम- कोमल मिश्रा “कोयल”

                             शहर – प्रयागराज


Related Posts

बलात्कार

June 24, 2022

 बलात्कार डॉ. इन्दु कुमारी  दरिंदगी की पहचान है  समाज का अभिशाप है  गंदगी की अंबार है  संकुचित विचारों का  गंदी

पृथ्वी दिवस

June 24, 2022

 पृथ्वी दिवस डॉ. इन्दु कुमारी  वसुंधरा को आइए  पेड़ों से सजाइए  वन बागों से इस धरा पर  जीवन की फसलें

प्रकृति के आंचल

June 24, 2022

 प्रकृति के आंचल डॉ. इन्दु कुमारी  प्रकृति हमारी हम प्रकृति के  सजाएंगे हम तो पाएंगे हम  लगाएंगे हम खाएंगे हम 

बुढ़ापे की मुंडेर

June 24, 2022

 बुढ़ापे की मुंडेर डॉ. इन्दु कुमारी  जन्म लिए बचपन बीते  खुशियों के होंठ खिले  बचपन के छोटे पौधे  फूल रूप

बेटी हुई

June 24, 2022

 बेटी हुई  डॉ. इन्दु कुमारी धीमी आवाज में  कहते बेटी हुई।  पापा देखो तेरी बेटी  आईपीएस की  टॉपर हुई। जिसका

मेघा रे

June 24, 2022

 मेघा रे डॉ. इन्दु कुमारी  मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे  मेरे संदेश को ले जाना रे   जिन राहों

PreviousNext

Leave a Comment