Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Champion hi champion by Sudhir Srivastava

 चैम्पियन ही चैम्पियन नीरज ने स्वर्ण दिया देश को अभिमान है, नीरज को हमारी और पूरे देश की बधाइयाँ हम …


 चैम्पियन ही चैम्पियन

Champion hi champion by Sudhir Srivastava

नीरज ने स्वर्ण दिया

देश को अभिमान है,

नीरज को हमारी और

पूरे देश की बधाइयाँ

हम सब उनके शुक्रगुज़ार हैं।

पर अफसोस भी है,क्षोभ भी है

देश में खेलों का अब भी

कोई निर्धारित मापदंड नहीं है।

जिन्हें खेलों की ए बी सी डी नहीं आती

वे खेलों के नियम बनाते है

खेल संघों के सर्वेसर्वा

खेल प्रशासक हो जाते हैं

समितियों के पदाधिकारी हैं,

भाई भतीजावाद पर क्या कहें?

ध्यानचंद को अभी तक 

भारतरत्न क्या दे पाये?

नेताओं के नाम पर स्टेडियमों के 

नामकरण से हम

खेल और खिलाड़ियों का

कितना सम्मान कर पाये?

मील का पत्थर बन चुके

बहुत से दुनियां छोड़ चुके

उनके सम्मान में हम

कितने सम्मानों का 

नामकरण कर पाये?

नयी पीढ़ी उनका अनुसरण

करे भी तो कैसे करे?

उनके व्यक्तित्व का हम

कितना सम्मान कर पाये?

जो पदक ले भी आये 

उन्हें भी हम कहाँ वास्तव में

धरोहर कहाँ बना पाये?

उनकी कद्र करना तो दूर

सम्मान देने के लिए भी

माँग करने पड़ते हैं,

जाने कितनी घोषणाएं फाइलों में 

सिर्फ़ घोषणा बनकर दम तोड़ देते हैं।

सच बताइए कितने हकदारों को

वास्तव में सम्मान मिलते हैं?

यह विडंबना नहीं तो क्या है

नामों की फेहरिस्त के साथ ही

अक्सर विवाद भी होते हैं।

एक दो पदकों पर हम

कितना उछलते हैं,

पदकों की चिंता में तो हम

कितना दुबले होते हैं,

बस खिलाड़ियों की बातों पर

कान भर नहीं देते।

काश ! हम अभी भी चेत जायें

खेलों की हर व्यवस्था

नीति निर्धारण में खेलों से जुड़े

खेल महारथियों को

खेलों में जीवन खपा चुके

लोगों को जिम्मेदार बनाइए।

एक दो पदकों की बात 

फिर भूल जाइये

स्वर्ण पदकों की गिनती नहीं

पदकों के शतकों की आस

विश्वास दोहराइए ।

तब जाकर सपने पूरे होंगे

थोक में स्वर्ण संग अनगिनत पदक 

देश की झोली में होंगे,

तब एक दो चैम्पियन नहीं

देश के हर कोने से

चैम्पियन ही चैम्पियन होंगे।

✍ सुधीर श्रीवास्तव

       गोण्डा, उ.प्र.,भारत

    8115285921

©मौलिक, स्वरचित,


Related Posts

व्यंग्य कविता-क्योंकि मैं शासन का जँवाई राजा हूं| kyuki Mai shashan ka jawai raja hun

December 10, 2022

यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय कर्मचारियों का शासन पद चेयर में अभूतपूर्व सम्मान हरे गुलाबी की बारिश जनता पर ठस्का समाज

हिम्मत ना हारो | Himmat na haro

December 2, 2022

हिम्मत ना हारो | Himmat na haro मत कहो तुमसे तय जिंदगी का सफ़र ना होगा,मैं बताता हूं कैसे डूबकर

प्रेम प्रसंग | Prem prasang | kavita

December 1, 2022

प्रेम प्रसंग प्रेम प्रसंग | Prem prasang | kavita एक छोटा सा शब्द हॉं! फिर बिखरी हुई जिंदगी।मंदिर मस्जिद दुआ

मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita

December 1, 2022

मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita मैं मुस्कुराना सीखी हूं दर्द को छुपा कर गम को दफनाकर

Samvidhan divas par kavita

November 25, 2022

कविता-भारत संविधान दिवस 26 नवंबर को मना रहा है हर भारतीय नागरिक के लिए 26 नवंबर का दिन खास है

Maa| माँ | maa par kavita

November 25, 2022

माँ |Maa Maa par kavita  माँ ममता की खान है,माँ दूजा भगवान है ।माँ की महिमा अपरंपार,माँ श्रेष्ठ-महान है ।।

PreviousNext

Leave a Comment