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Bhul jane ki takat rakhte hai by vijay Lakshmi Pandey

 भूल जानें की ताक़त रखते हैं …!! हर लम्हा गुज़रता है मेरा , दर्द     के   आग़ोश   में । जख़्म  …


 भूल जानें की ताक़त रखते हैं …!!

Bhul jane ki takat rakhte hai by vijay Lakshmi Pandey

हर लम्हा गुज़रता है मेरा ,

दर्द     के   आग़ोश   में ।

जख़्म  क्या  देगा   कोई ,

हूँ   कहाँ   मैं  होश   में ।।

*******************

आँखों   में   समंदर   की ,

लहरें             समेटकर ।

बातों  में  ख़ूब  सूरत सी,

नज़ाकत       रखते  हैं ।।

जख़्म    दफ़न    करना,

आदत     है      हमारी ।

पलभर में मान जानें की,

शराफ़त    रखते     हैं ।।

कभी रोए ना मुस्कुराए,

ये  मेहरबानीं  आपकी ।

हम  तो  अपनें  आपसे ,

शिक़ायत    रखते   हैं ।।

टूटें   या    बिख़र जाएं ,

कुछ  उसूल   है  हमारा।

नाज़   है   ख़ुद      पर,

ये    खुद्दारी   रखते हैं ।।

कभी  मुस्कुरा  लेते  हैं,

ज़मानें  के  ख़ौफ़   से ।

बड़े   ज़ालिम  हैं  लोग ,

फ़िक्र हमारी  रखते हैं ।।

किताबों   से     नज़्म ,

रुख़्सत  हैं  आज़कल।

नग़में     पिरोनें     की ,

क़लमकारी  रखते हैं ।।

बन्दग़ी  इस   उम्र की ,

क़ुबूल   कर   “विजय”।

जो खो गया भूल जाने की, 

ताक़त     रखते     हैं ।।

             विजय लक्ष्मी पाण्डेय

             एम. ए., बी.एड.,(हिन्दी)

             स्वरचित मौलिक रचना

                   आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


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