Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Beti aur dahej by km. Soni muskan

 बेटी और दहेज बेटियां न जाने कब तक बिकती रहेंगी दहेज के बाजार में लोग बेटी को स्वीकार करते हैं …


 बेटी और दहेज

Beti aur dahej by km. Soni muskan

बेटियां न जाने कब तक बिकती रहेंगी

दहेज के बाजार में

लोग बेटी को स्वीकार करते हैं

बेटे के इंतजार में

बेटियां करें भी तो क्या करें

वह तो मजबूर हैं

मैं दुनियाँ  के लोगों से पूछती हूं

आखिर बेटियों का क्या कसूर है?..

खिली गुलाब जैसी बेटी मीठी सी मुस्कान है

घर की चहल पहल बेटी सबके घर में आई मेहमान है

वह तो उन घरानों की पहचान बनने चली

जिन घरानों से बेटियां अनजान है

दहेज है समाज का अभिशाप

इससे बढ़ रहा अधर्म और पाप

हर जन्म पर बढ़ती जा रही इसकी छाप

धन के लोभी करे इसका जाप

आखिर इसमें दोष क्या है बेचारी अबला नारी का

दोषी तो वह दहेज है जो बसा न सका घर कन्या कुंवारी का

तड़पती हैं बेटियां जीवन भर ससुराल में

सैकड़ों खुदकुशी कर रही यहां प्रत्येक साल में

आखिर कब तक वंचित रहेंगी बेटियां

अपने अधिकार से

दहेज को मिटाना होगा हमे संसार से

बहु बेटियां जल रही दिन हो या रात

हे मानव दहेज से दिला दो इनको निजात

क्योंकि हर मानव है एक बेटी का बाप

एक बेटी को उसके पिता की तरह प्यार तो दे कर देखो

उसका दर्द थोड़ा बांट कर तो देखो

दर्द तुम्हें होगा और तड़प जाती हैं बेटियां

हे मानव! क्यों तू नही समझता लड़की कोई खिलौना नहीं

उसे भी जीने का अधिकार दे

दहेज की वजह से उसकी अस्मिता मत छीन

उसे भी अपनी तरह सम्मान दे।..


Related Posts

कविता-वो पंछियों के घरौंदे

May 2, 2022

वो पंछियों के घरौंदे आज भी उसी पेड़ की शाख पर वही पंछियों के घरौंदे हम पाए थे।।जो कभी हमनें

कविता -गर्मी

May 1, 2022

गर्मी बेवफाई की चांद नेचांद को तो कुछ कह नहीं पाए लेकिन मोहब्बत इतनी थीको उसे भूला भी न पाए

मैं महाराष्ट्र निवासी -कविता

April 30, 2022

कविता -मैं महाराष्ट्र निवासी आज अपने महाराष्ट्र राज्य कि गाथा गाके मैं सुनाती हूं।।मैं महाराष्ट्र कि निवासी गर्व सेभर सीना

बनाओ एकता की चैन

April 30, 2022

बनाओ एकता की  चैन शहीदों कि अरमानों की  सूली परदेखो चढ़ रहा मेरा वतन ।। शहीदों के बलिदानों से मिली

पड़ाव

April 30, 2022

पड़ाव ढल रही थी सांझ सी उम्र की लाली भीगहरी होती जा रही थी समझदारी की लकीरेंबालों में भी शुरू

स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता

April 30, 2022

स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता स्वतंत्रता दिवस की अमृत जयंती स्वतंत्रता दिवस की

PreviousNext

Leave a Comment