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Ashish Tiwari, poem

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी …


हे नववर्ष!
तुम भी दगा न करना

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल
आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना
बीते जैसे साल पुराने वैसी कोई ख़ता न करना।

पहले के ज़ख्म़ों से ही चाक शहर का सीना है
नये साल में दर्द मिलें किसी को ख़ुदा न करना।

मेरी इल्तज़ा तुझसे बस इतनी है हे नववर्ष
अपनों को यूँ अपनो से तुम ज़ुदा न करना।

संकट के इस दौर में तू पूरे मन से पूजा जाएगा
फरिश्ता साबित होगा , किसी का बुरा न करना।

संकट से जूझ रहे हैं सब,विषाद से गहरा नाता है
ऐसे में आकर के शेष जीवन बे-मज़ा न करना।

सबका हो सुनहरा आने वाला हर एक पल
किसी के लिए कोई भी बुरी बद्दुआ न करना ।

आशीष तिवारी निर्मल
मकान नंबर 702 लालगाँव
जिला रीवा ( मध्य प्रदेश)


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