Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, satyawan_saurabh

हर दिन करवा चौथ●

हर दिन करवा चौथ● जिनके सच्चे प्यार ने, भर दी मन की थोथ ।उनके जीवन में रहा, हर दिन करवा …


हर दिन करवा चौथ●

जिनके सच्चे प्यार ने, भर दी मन की थोथ ।
उनके जीवन में रहा, हर दिन करवा चौथ ।।

हम ये सीखें चाँद से, होता है क्या प्यार ।
कुछ कमियों के दाग से, टूटे न ऐतबार ।।

मन ने तेरा व्रत लिया, हुई चाँदनी शाम ।
साथी मैंने कर दिया, सब कुछ तेरे नाम ।।

मन में तेरा प्यार है, आँखों में तस्वीर ।
हर लम्हे में है छुपी, बस तेरी तासीर ।।

अब तो मेरी कलम भी, करती तुमसे प्यार ।
नाम तुम्हारा ही लिखे, कागज़ पर हर बार ।।

मन चातक ने है रखा, साथी यूँ उपवास ।
बुझे न तेरे बिन परी, अब ‘सौरभ’ की प्यास ।।

तुम राधा, मेरी बनो, मुझको कान्हा जान ।
दुनिया सारी छोड़कर, धर लें बस ये ध्यान ।।

मेरे गीतों में बसी, बनकर तुम संगीत ।
टूटा हुआ सितार हूँ, बिना तुम्हारे मीत ।।

माने कब हैं प्यार ने, ऊँच-नीच के पाश ।
झुकता सदा ज़मीन पर, सज़दे में आकाश ।।

About author

Satyawan saurabh
 
– डॉo सत्यवान ‘सौरभ’
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,

333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045
facebook – https://www.facebook.com/saty.verma333

twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh



Related Posts

अदृश्य प्रलय

September 27, 2022

अदृश्य प्रलय चल रहा एक अदृश्य प्रलयजो न जग को दृष्टिमान होता,सब सजग मधु रागिनी मेंसुप्त होता लुप्त होता।तड़ित ने

हौसलों की उड़ान। (Poem)

September 27, 2022

हौसलों की उड़ान। चलो भरे हौसले की उड़ान,पार करें हर इम्तिहान,खुद से वादा करकेकरें स्वयं की बात का सम्मान। हमारा

जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी

September 26, 2022

              कविता(poem) जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी वित्तीय हालत ख़राब है तो क्या हुआ

पापा मैं बोझ नहीं

September 24, 2022

विश्व बालिका दिवस पर विशेष 💓 पापा मैं बोझ नहीं 💓 मम्मी – पापा मैं बेटी हूँ आपकीपर , क्या

पिता के लिए कोई शब्द नहीं

September 22, 2022

कविता पिता के लिए कोई शब्द नहीं पिता की ज्ञानवर्धक बातों को अनुशासन से समझते नहींपिता के लिए कोई शब्द

कविता– उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !

September 22, 2022

कविता- उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !  उस दिन बहुत गहमागहमी थी  जब एक हास्य कलाकार

PreviousNext

Leave a Comment