Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, satyawan_saurabh

सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया

फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का …


फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का फर्ज एक पुलिसकर्मी बेहतर ढंग से निभा सकता है। वो भी महिला पुलिसकर्मी। इसका काबिले गौर उदाहरण बनी है सोनिया जोशी जो अभी उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं। अपनी ड्यूटी के साथ आम जनता की सेवा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होकर अपना कर्तव्य निभा रही है सोनिया जोशी। महिला सिपाही वर्दी के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों को मिटाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने पुलिस में कठिन और प्रतिकूल स्थितियों में न सिर्फ अपने जीवन को संभाला। बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का विषय बनी। आज वह समाज में अलग-अलग कार्य में सक्रिय हैं। बता दें कि इस मुहिम का झंडा हाथ में लेकर काम आसान नहीं था। ऐसे काम आसान भी नहीं होते सोनिया ने मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता के कई ऐसे मुकाम हासिल किए हैं जो हर किसी के लिए मिसाल है।

-डॉ सत्यवान सौरभ

जीवन में सबके अपने सपने होते हैं लेकिन उन सपनों को अगर किसी भी माध्यम से देश की सेवा के साथ-साथ किसी गरीब, असहाय के मदद से जोड़ सके तो सोने पर सुहागा, जी हाँ कुछ ऐसा ही कर रही भारत की बेटी सोनिया जोशी जो अभी उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं। ड्यूटी के साथ- साथ एक सिंगर, कवयित्री, गीतकार एक्ट्रेस भी है। सोनिया “ हिंदी, गढ़वाली, सॉन्ग्स बहुत ही बेहतरीन तरीके से गाती है। बचपन से ही अपने स्कूल कॉलेज के प्रोग्रामो में भी भाग लेती रही सोनिया जोशी का जन्म 22 अगस्त 1992 को माता श्रीमती मधु जोशी (ग्रहणी) एवं पिता श्री हरीश चंद्र जोशी (रिटायर्ड आईटीबीपी) के घर, ग्राम घानियाल पोस्ट ऑफिस तलवाडी चमोली में हुआ। सोनिया के परिवार में माता-पिता के अलावा एक छोटी बहिन और एक छोटा भाई भी है। उनका परिवार एक निम्न मध्यम वर्ग से है। परिवार में शुरुआत से ही बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा परन्तु माता-पिता ने पालन पोषण व पढाई में कोई कमी नही छोड़ी।

सोनिया ने शिक्षा अलग-अलग जगह से प्राप्त की है। पिताजी जब आईटीबीपी मातली उत्तरकाशी में कार्यरत थे तो आठवीं तक की पढ़ाई मातली इंटर कॉलेज में की है और उसके बाद की 10वीं 12वीं की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज तलवाडी से फिर बीएससी राजकीय महाविद्यालय तलवाड़ी से की। उसके बाद देहरादून से बीएड किया। स्कूल टाइम से ही उन्हें गाने का व कविता लिखने का शौक था। स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर ही उन्हें संगीत में रुचि बढ़ने लगी। खेलकूद में भी हमेशा आगे ही रही। 100 मीटर रेस व हाई जंप में प्रतिभाग किया है।

 स्कूल कॉलेज का मान हमेशा बढ़ाया बस हार कभी नहीं मानी। वर्दी पहनने के बाद वह अपनी कविता और अपने गानों के माध्यम से भी जनता की सेवा कर रही है। समाज मे फैली कई बुराइयों, संकीर्ण भावनाओं को दूर करने के लिए भावों, विचारों को अपनी कविता और अपने गीतों के माध्यम से समाज में रखने का समय-समय पर प्रयास करती है। परिवार एवं मित्रों के सहयोग से ड्यूटी के दौरान समय निकाल कर गीत रिकॉर्ड करती है। समाज में फैली बुराइयों जैसे भ्रूण हत्या, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अन्य ऐसी कई गीतों पर स्वयं अभिनय भी कर चुकी है। इनके गीतों को लोगो ने बहुत सहराया है। तेरी मिट्टी गीत गा कर इन्हे एक राष्ट्रीय पहचान मिली। जिसे एक दिन में 40 लाख लोगों ने पसंद किया और एक हफ्ते में 1 करोड़ लोगों ने पसंद किया। फिर तू कितनी अच्छी है गीत भी लोगों बहुत पसंद किया। जिसे अभी तक 40लाख लोगों ने पसंद किया है। देश के जवानों को समर्पित गीत, मेरा एक सलाम, और महिला सशक्तिकरण पर भी हौसला गीत काफी सराहे गए है।

सोनिया बताती है कि परिवार का साथ और मित्रों का सपोर्ट उन्हें निरंतर अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करता रहता है। आगे चलकर वो उत्तराखण्ड संगीत जगत को देश और दुनिया के बीच जो-शोर से पहुँचाना चाहती है। और समाज में अपने गीतों के माध्यम से कुरुतियों पर चोट करके जनता को जागरूक करना चाहती है। उनका मानना हैं कि मनुष्य भावनाओं से जुडा होता है और अगर आपको समाज को बदलना है तो संगीत में बहुत ताकत होती है। इनके कुछ हिट गाने (तू हौसला रख), (पुकार), (तुमको नमन), सुरकंडा भवानी भजन, इक सलाम देशभक्ति, हौसला है सोनिया को बैटमिंटन खेलना, सिन्गिंग और गाना व कविता लिखना पसंद है। साथ ही खाने मे अलग-अलग डिसेस बनाकर खिलाने का शौक रखती है। खाली समय में उन्हें कविताएं लिखना, मूवीज देखना और भजन सुनना पसंद है।

फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का फर्ज एक पुलिसकर्मी बेहतर ढंग से निभा सकता है। वो भी महिला पुलिसकर्मी। इसका काबिले गौर उदाहरण बनी है सोनिया जोशी जो अभी उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं। अपनी ड्यूटी के साथ आम जनता की सेवा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी होकर अपना कर्तव्य निभा रही है सोनिया जोशी। महिला सिपाही वर्दी के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों को मिटाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने पुलिस में कठिन और प्रतिकूल स्थितियों में न सिर्फ अपने जीवन को संभाला। बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का विषय बनी। आज वह समाज में अलग-अलग कार्य में सक्रिय हैं। बता दें कि इस मुहिम का झंडा हाथ में लेकर काम आसान नहीं था। ऐसे काम आसान भी नहीं होते सोनिया ने मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता के कई ऐसे मुकाम हासिल किए हैं जो हर किसी के लिए मिसाल है।

About author

Satyawan saurabh
 
– डॉo सत्यवान ‘सौरभ’
कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,

333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045
facebook – https://www.facebook.com/saty.verma333

twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh



Related Posts

maa ko chhod dhaye kyo lekh by jayshree birmi

September 13, 2021

 मां को छोड़ धाय क्यों? मातृ भाषा में व्यक्ति अभिव्यक्ति खुल के कर सकता हैं।जिस भाषा सुन बोलना सीखा वही

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

September 13, 2021

हिंदी माथे की बिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को

Jeevan aur samay chalte rahenge aalekh by Sudhir Srivastava

September 12, 2021

 आलेख        जीवन और समय चलते रहेंगें              कहते हैं समय और जीवन

Badalta parivesh, paryavaran aur uska mahatav

September 9, 2021

बदलता परिवेश पर्यावरण एवं उसका महत्व हमारा परिवेश बढ़ती जनसंख्या और हो रहे विकास के कारण हमारे आसपास के परिवेश

Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai

September 9, 2021

 Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai जंगल स्वतंत्रता का एक अद्वितीय उदाहरण है, जहां कोई नियम नहीं , जिसकी पहली

covid 19 ek vaishvik mahamaari

September 9, 2021

 Covid 19 एक वैश्विक महामारी  आज हम एक ऐसी वैश्विक आपदा की बात कर रहे है जिसने पूरे विश्व में

Leave a Comment