Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

cinema, lekh, Virendra bahadur

सुपरहिट:सिक्सरबाज सलीम दुरानी का फिल्मी ‘चारित्र्य’

सुपरहिट:सिक्सरबाज सलीम दुरानी का फिल्मी ‘चारित्र्य’ बीते रविवार यानी 2 अप्रैल को जिनकी मौत हुई, वह भारतीय क्रिकेट के आलराउंडर …


सुपरहिट:सिक्सरबाज सलीम दुरानी का फिल्मी ‘चारित्र्य’

सुपरहिट:सिक्सरबाज सलीम दुरानी का फिल्मी 'चारित्र्य'

बीते रविवार यानी 2 अप्रैल को जिनकी मौत हुई, वह भारतीय क्रिकेट के आलराउंडर सलीम दुरानी के नाम इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज (1961-62) जीतने, वेस्टइंडीज के खिलाफ (1970) पहली सीरीज जीतने और क्लाइव लाॅयड तथा गेरी सोबर्स का विकेट लेने का रेकॉर्ड तो है ही, उनके नाम दूसरा भी एक ‘रेकॉर्ड’ है, क्रिकेटरों के फिल्मों में काम करने की शुरुआत उन्हीं से हुई थी।
बहुत कम लोगों को याद होगा कि 1973 में आई परवीन बाबी की पहली फिल्म ‘चरित्र’ में उनके साथ हीरो के रूप में सलीम दुरानी थे। फिल्म बुरी तरह पिट गई थी, इसलिए वह याद करने लायक भी नहीं रही। पर परवीन बाबी और सलीम दुरानी की बात हो तो चरित्र के एक संदर्भ पर ध्यान देने लायक है। इस फिल्म से बालीवुड को चकाचौंध करने वाली परवीन बाबी मिलीं और सलीम दुरानी का भावी क्रिकेटरों का बालीवुड से भेंट हुई।
‘चरित्र’ बी.आर. (बाबूराम) इशारा ने बनाई थी। उनका मूल नाम रोशनलाल शर्मा था। वह हिमाचल प्रदेश में पैदा हुए थे। उस समय के गांव के लड़कों की तरह हिंदी फिल्मों की चकाचौंध देख कर वह घर से भाग कर मुंबई आ गए थे। फिल्मों के सेट पर चाय बेंचते-बांटते थे। फिल्मी कलाकार-हुनरमंद रोशन को बाबू कह कर बुलाते थे। इसी से उनका नाम बाबू पड़ गया। चाय बेचते-बेचते वह स्पाट ब्वाय बने, उसके बाद संवाद लिखने लगे। इसी तरह एक फिल्म से उन्हें ‘इशारा’ तखल्लुस मिला और इस तरह बी.आर. इशारा का जन्म हुआ।
इशारा बोल्ड सोच वाले थे। उनके मन में बोल्ड विषयों पर कहानियां घूमती थीं। इसका पता इसी बात से चलता है कि ‘चेतना’ (रेहाना सुलतान-अनिल धवन) फिल्म में मिलना था। इसमें एक ऐसी सेक्सवर्कर की कहानी थी, जो अंतत: किसी तरह वैवाहिक जीवन शुरू करती है और प्रेग्नेंट हो जाती है। तब वह शंका में पड़ जाती है कि बच्चा किस का है। इसमें वह मानसिक रूप से खत्म हो जाती है और शराबी बन जाती है।
इशारा के शुरुआती संघर्ष के दिनों में एम.आई. कुन्नू नाम का निर्माता-एडिटर उनका दोस्त था और दोनों जन साथ फिल्म बनाते थे। दोनो ने ‘जरूरत’ नाम की पहली फिल्म बनाई थी। इसमें बहुत बोल्ड दृश्य थे, जिससे यह सेंसर में अटक गई। इस बीच इन्होंने ‘चेतना’ बनाई, जिससे इन्हें नाम मिला।
‘चरित्र’ इनकी ग्यारहवीं फिल्म थी। यह चेतना की सिक्वल थी। इसमें गरीब परिवार की कालेजियन लड़की शिखा (परवीन बाबी) अपने पिता (मनमोहन कृष्ण) के कर्ज के कारण आनंद प्रकाश (गौतम सरीन) नामक एक युवक के आफिस में काम करने लगती है। आनंद को शिखा में रुचि हो जाती है तो वह उसे ब्लैकमेल करने लगता है। इसमें शिखा प्रेग्नेंट हो जाती है और आनंद इसकी जिम्मेदारी लेने से मना कर देता है। ऐसे में बड़े बाप की बिगड़ी औलाद अशोक शर्मा (सलीम दुरानी) शिखा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखता है और उसके बच्चे को स्वीकार करता है।
फिल्म ‘चरित्र’ के लिए इशारा ने नए कलाकार लेना तय किया था। परवीन बाबी तब अहमदाबाद में पढ़ रही थीं और सलीम दुरानी क्रिकेट के कैरियर में शिखर पर थे। एक पूरापे इंटरव्यू में परवीन बाबी ने कहा था, “मुझे फिल्म स्टार बनने की चाहत नहीं थी। मैं स्टेज पर ऐक्टिंग कर के खुश थी। मैं अहमदाबाद में खूब नाटक करती थी।मैं साहित्य में एमए कर रही थी, तभी अचानक एक बार इशारा से मिली थी। उन्होंने ही मेरे अंदर फिल्मों का कीड़ा डाला था।”
इसमें थोड़ा विवाद है। कहा जाता है कि देव आनंद की फिल्म ‘गाइड’ में वहीदा रहमान के पति मार्को की भूमिका करने वाले किशोर शाहू ने 1974 में ‘दुल्हन की लकीर’ के लिए परवीन को पहले साइन किया था। उन्होंने फोटोशूट के लिए परवीन को मुंबई बुलाया था। उसके बाद वह अहमदाबाद वापस चली गई थीं। साहू ने ‘तीन नवोदितों’- परवीन, रमेश अरोरा और आशिष बोहरा की इस फिल्म की घोषणा भी कर दी थी।
इशारा के दावों के अनुसार, वह ‘एक नदी दो किनारे’ नाम की एक फिल्म की शूटिंग अहमदाबाद के एक बंगले में कर रहे थे, तब शूटिंग देखने वालों की भीड़ में एक आकर्षक लड़की देखी थी। एक इंटरव्यू में इशारा ने कहा था, “टी-शर्ट, जींस, कंधे तक बाल और हाथ में सिगरेट लिए वह एकदम मार्डन लग रही थी। हिप्पी जैसी ताजी और बिंदास दिखाई दे रही थी।”
इशारा ने अपने फोटोग्राफर से बाबी का फोटो खींचने को कहा था। फोटो में वह खूबसूरत दिखाई दे रही थी, इसलिए अगले दिन उसे मिलने के लिए बुलाया और कहा कि मुझे तुम्हारे साथ फिल्म करना है। ऐसा नहीं था कि परवीन मुग्ध लड़की की तरह उछल पड़ी थी। उसने शांति से कहा था कि आप की फिल्म में मुझे रोल अच्छा लगेगा तो मैं करूंगी। इशारा को इस नवोदित लड़की का आत्मविश्वास पसंद आ गया था। उन्होंने उसे साइन कर लिया था।
कहा जाता है कि मुंबई जाने के बाद इशारा दूसरे कामों में व्यस्त हो गए। परवीन अहमदाबाद में बेचैन होने लगी थी। उसी बीच वह शाहू के परिचय में आई थी और उनके साथ फिल्म करने को तैयार हो गई थी। अंतत: इशारा जब ‘चरित्र’ के लिए तैयार हुए, तब बाबी के हाथ में दो फिल्में थीं- ‘चरित्र’ और ‘दुल्हन की लकीर’। ऐसा कहा जाता है कि साहू और इशारा के बीच किस की फिल्म पहले रिलीज होगी, इसको लेकर समझौता हुआ था। इस तरह ‘चरित्र’ पहले आई और ‘दुल्हन की लकीर’ बाद में, संयोग से जो किशोर साहू की अंतिम फिल्म थी।
1974 में स्टारडस्ट पत्रिका को दिए अपने एक इंटरव्यू में परवीन बाबी ने कहा था, “‘चरित्र’ कामर्शियल फिल्म नहीं थी। यह मुझे पहले से ही पता था। पर पात्र-चित्रण अच्छा था और लोगों ने मेरे परफार्मेंस को बखाना था।” इस फिल्म की शूटिंग पुणे में चल रही थी, तभी परवीन बाबी नाम की नई लड़की की चर्चा शुरू हो गई थी। फिल्म तो फ्लाप हो गई थी, पर बाबी हिट हो गई थी।
सलीम दुरानी का भी कुछ ऐसा ही था। जिस तरह परवीन बाबी की सुंदरता का सेंटजेवियर्स कालेज में सिक्का चलता था, उसी तरह लंबे-पतले और हल्की भूरी आंखों के मालिक सलीम दुरानी भी क्रिकेट के स्टेडियम में और बाहर लड़कियों की आंख का तारा थे। उन्होंने कुछ विज्ञापनों में माॅडलिंग भी की थी। उनके एक मामा फिल्म व्यवसाय में थे और वह इशारा को जानते थे। उन्हीं के माध्यम से ‘चरित्र’ फिल्म का ऑफर उनके पास आया था।
1971 में सुबोध बनर्जी की सुपरहिट फिल्म ‘शर्मीली’ में राखी के साथ शशी कपूर की भूमिका सलीम दुरानी को ऑफर की गई थी। पर क्रिकेट मैचों की वजह से वह समय नहीं दे सके थे। 1969 में खालिद अख्तर नाम के एक निर्देशक ने तनुजा को लेकर ‘एक मासूम’ फिल्म बनाई थी। एक हत्या के आसपास घूमने वाली इस फिल्म में एक हीरो सलीम दुरानी ने तीन लोगों- रमेश, दीपक और जगदीश की भूमिका की थी।
सलीम दुरानी के फिल्मी कैरियर के तमाम लेखों में इस ‘एक मासूम’ फिल्म का खास उल्लेख हुआ है। पर वह यह सलीम दुरानी यानी क्रिकेटर सलीम दुरानी नहीं थे। मजे की बात तो यह है कि जिस तरह सलीम दुरानी के नाम एक ही फिल्म चारित्र्य बोलती है, उसी तरह तनुजा वाला सलीम दुरानी के बारे में भी एक ही फिल्म ‘एक मासूम’ बोलती है। (इन दोनों सलीम के बारे में जानने वाले लोगों को भूल हो रही हो तो सुधार सकते हैं)
सलीम दुरानी अपने सिक्सरों के लिए जाने जाते हैं, वह शायद पहले बैट्समैन थे, जो दर्शकों की डिमांड पर छक्का मारते थे। चारित्र्य फिल्म के बाद भी अगर वह बालीवुड की पिच पर चालू रखते तो अच्छों-अच्छों के छक्के छुड़ा दिया होता।

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)


Related Posts

युवा शक्ति का दोहन-कौशल और शिक्षा

March 13, 2023

‘युवा शक्ति का दोहन-कौशल और शिक्षा’ युवाओं को सशक्त बनाने की कुंजी, कौशल विकास के साथ है, जब एक युवा

समय न ठहरा है कभी, रुके न इसके पाँव।

March 13, 2023

समय न ठहरा है कभी,रुके न इसके पाँव।संग समय के जो चले, पहुंचे अपने गाँव।। जब हम समय बर्बाद करते

बालकथा:समुद्र पार पोपाय ने ब्लुटो को हराया

March 13, 2023

 बालकथा:समुद्र पार पोपाय ने ब्लुटो को हराया ब्लुटो पहले से ही पोपाय का दुश्मन था। वह पोपाय को हराने के

ए बाबू! गर्मी के अलर्ट पर ध्यान दीजिएगा!

March 9, 2023

 ए बाबू! गर्मी के अलर्ट पर ध्यान दीजिएगा!  जलवायु परिवर्तन बनाम  अत्यधिक गर्मी की आपदाएं – पीएम ने उच्च स्तरीय

Medical tourism destination india |मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन इंडिया

March 9, 2023

Medical tourism destination india |मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लस वूमेन रिसोर्से इक्वलटू विकसित हेल्थ और वैलनेस इकोसिस्टम भारत स्वास्थ्य

नारी शक्ति फॉर न्यू इंडिया

March 9, 2023

नारी शक्ति फॉर न्यू इंडिया भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र के अवरोधों को ध्वस्त कर नारी शक्ति का कर रही आगाज़

PreviousNext

Leave a Comment