Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता …


सुकूँ चाहता है

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी
ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है

जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?
जमाना बुरा है तूँ कहता है सबसे
फिर ज़माने से क्यूँ गुफ़्तगू चाहता है
जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है
हो सकता है तेरा ख़यालात बदले
तूँ भी बदल जाए जब हालात बदले
ये तुझे ही पता है बस तूँ ही जाने
इस ज़माने को बदलना क्यूँ तूँ चाहता है
जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है
ये माना के तूँ आला है सबसे
तूने जो खुद को संभाला है कबसे
मिलना है मुश्किल ये तुझे भी पता है
तो आदमी खुद सा क्यों हूबहू चाहता है
जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?
क्या माजरा है ? तूँ बताता नहीं है
वैसे तो कुछ भी छिपाता नहीं है
मैं हैरान हूँ और परेशान हूँ
के माजरे को छिपाना तूँ क्यूँ चाहता है
जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

हां ये तपिश हैं

February 7, 2022

हां ये तपिश हैं ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहकलाखों में न सही हजारों में हीललकार हैं प्रतिकार

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम- सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम हे बापू हे राष्टृपिता संत साबरमती केपुजारी अहिंसा केतुम्हें नमन हैकोटि कोटि प्रणाम है।देश में आज

Leave a Comment