Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Siddharth_Gorakhpuri

सावन की बौछार

 सावन की बौछार सावन की बौछार यारतन – मन को भिगाती हैमस्त फुहारें इस सावन कीयाद किसी की दिलाती है …


 सावन की बौछार

सावन की बौछार यार
तन – मन को भिगाती है
मस्त फुहारें इस सावन की
याद किसी की दिलाती है

सावन के झूले अबतो
हर ओर निहारा करतें हैं
कोई तो आकर के झूले
रोज पुकारा करते हैं
पेड़ की डाली भी खुद से
अब ऊपर नीचे आती है
मस्त फुहारें इस सावन की
याद किसी की दिलाती है

कजरी वाले गीत गुम हुए
कोयल भी बेजुबान हुई
अबके सावन की बारिश भी
बस कुछ दिन की मेहमान हुई
आया करो प्रीत बरसाने
धरती सावन को सिखाती है
मस्त फुहारें इस सावन की
याद किसी की दिलाती है

त्यौहार नहीं त्यौहार के जैसे
अब सावन में लगते हैं
मौसम की है दोमुही मार
बस बादल रोज गरजते हैं
प्रकृति भी अब तो धरा पर
प्रीत को कम बरसाती है

About author

-सिद्धार्थ गोरखपुरी

-सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

हार क्यों मान ली जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

हार क्यों मान ली जाए? बुरे से बुरा क्या हो सकता हैहमारे साथ?यही कि हमारी धन – संपत्तिहमारे हाथ से

सफेद आसमां- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सफेद आसमां कड़ाके की सर्दी मेंरजाई का मोह छोड़ पाओ अगरतो निकलो बाहर जराआंगन चौबारे तक, देखो ऊपर!आसमान बरसा रहा

खट्टी मीठी यादें – डॉ इंदु कुमारी

January 6, 2022

खट्टी मीठी यादें आती है मानस पटल परउभरकर वो सुनहरी यादें प्रेम रस में भीगा -भींगामधुरमय स्नेहिल सौगातें जिनकी यादें

Leave a Comment