Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, satyawan_saurabh

सहमा-सहमा आज| sahma sahma aaji

 सहमा-सहमा आज कौन पूछता योग्यता, तिकड़म है आधार । कौवे मोती चुन रहे, हंस हुये बेकार ।। परिवर्तन के दौर …


 सहमा-सहमा आज

सहमा-सहमा आज| sahma sahma aaji

कौन पूछता योग्यता, तिकड़म है आधार ।

कौवे मोती चुन रहे, हंस हुये बेकार ।।

परिवर्तन के दौर की, ये कैसी रफ़्तार ।

गैरों को सिर पर रखें, अपने लगते भार ।।

अंधे साक्षी हैं बनें, गूंगे करें बयान ।

बहरे थामे न्याय की, ‘सौरभ’ आज कमान ।।

कौवे में पूर्वज दिखे, पत्थर में भगवान ।

इंसानो में क्यों यहाँ, दिखे नहीं इंसान ।।

जब से पैसा हो गया, संबंधों की माप ।

मन दर्जी करने लगा, बस खाली आलाप ।।

दहेज़ आहुति हो गया, रस्में सब व्यापार ।

धू-धू कर अब जल रहे, शादी के संस्कार ।।

हारे इज़्ज़त आबरू, भीरु बुजदिल लोग ।

खोकर अपनी सभ्यता, प्रश्नचिन्ह पे लोग ।।

अच्छे दिन आये नहीं, सहमा-सहमा आज ।

‘सौरभ’ हुए पेट्रोल से, महंगे आलू-प्याज ।।

गली-गली में मौत है, सड़क-सड़क बेहाल ।

डर-डर के हम जी रहे, देख देश का हाल ।।

लूट-खून दंगे कहीं, चोरी भ्रष्टाचार ।

ख़बरें ऐसी ला रहा, रोज सुबह अखबार ।।

सास ससुर सेवा करे, बहुएं करती राज ।

बेटी सँग दामाद के, बसी मायके आज ।।

(सत्यवान सौरभ के चर्चित दोहा संग्रह तितली है खामोश से )

— सत्यवान ‘सौरभ’, 

रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,

333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045

facebook – https://www.facebook.com/saty.verma333

twitter- https://twitter.com/SatyawanSaurabh


Related Posts

शिक्षक(Teacher’s day special)

September 4, 2022

शिक्षक अज्ञानता को दूर कर हमसेज्ञान का जो पाठ पढ़ाये, वह कहलाते गुरु (शिक्षक) हमारेकरे क्या वर्णन आज, इकठ्ठा हुए

मेरी शब्दों की वैणी

September 4, 2022

मेरी शब्दों की वैणी यादों के भंवर में डूब कर मैं अकसर मोतियन से शब्द लातीबगिया शब्दों कि मेरी जहां

गुरुवर जलते दीप से(शिक्षक दिवस विशेष)

September 4, 2022

गुरुवर जलते दीप से दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब

आई पिया की याद..!!

September 1, 2022

आई पिया की याद..!! मन मयूर तन तरुण हुआबरखा नें छेड़े राग।गरज गरज घन बरस रहेआई पिया की याद।। छानी

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन

September 1, 2022

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन नन्हीं सी पीठ पर बस्ते का बोझ हैदब रहा है बचपन लूट

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले

September 1, 2022

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकालेजो टूट मैं गया तो

PreviousNext

Leave a Comment