Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Anita_sharma, poem

सलोनी के कुसुम”- अनिता शर्मा झाँसी

सलोनी के कुसुम” इंसान बेइन्तहा मजबूर दिखा,कुसुम सी बालिकाएं तीर्थ पर,बेंच रही पूजा का सामान छोली में।चेहरे पर मुस्कान बिखेरी …


सलोनी के कुसुम”

सलोनी के कुसुम"- अनिता शर्मा झाँसी

इंसान बेइन्तहा मजबूर दिखा,
कुसुम सी बालिकाएं तीर्थ पर,
बेंच रही पूजा का सामान छोली में।
चेहरे पर मुस्कान बिखेरी ,
आशा की किरण भरी आंखो में,
ले लो बाबू,ले लो अम्मा !
खूब मिलेगा आशीर्वाद तुम्हें।
बेचैनी से व्याकुल होकर,
बस दस रूपये का है प्रसाद।
गंगा/यमुना/नर्मदा के तटों पर,
सजे कुसुम के साथ दिये लिए,
पीछे पीछे फिरते बच्चे ले लो न?
ले लेते तो चमकती आँखे ,
और चेहरे पर मुस्का दिखी।
पर बेबसी का आलम देखा,
उम्र दिखी स्कूल गमन की।
गरीबी की इन्तिहा कुछ ऐसी,
माँ बाप लाचार दिखे।।

—अनिता शर्मा झाँसी
—-मौलिक रचना


Related Posts

ये ना सोचो/ye na socho

November 5, 2022

ये ना सोचो कशमोकश मे उलझी मेरी जवानी हैलोग कहते वीणा कलम कि दीवानी है।। हालाते मंज़रों ने जज़्बात लिखना

कविता-मानगढ़ धाम की गौरव गाथा/mangarh dham ki Gaurav yatra

November 5, 2022

आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों को याद करने

कविता-विकास के नाम से सुना था/vikas ke nam se soona tha

November 5, 2022

कविता-विकास के नाम से सुना था विकास के नाम से सुना था पर उसका भी दामन खाली हैकिसे सुनाऊं अपनी

कविता-हम जनता सबके मालिक हैं/hum janta sabke malik hai

November 5, 2022

कविता-हम जनता सबके मालिक हैं सरकार कानून सब साथ देंगे बस हमें कदम बढ़ाना हैहम जनता सबके मालिक हैं यह

कविता-मुस्कान में मिठास की परछाई है/ muskan me mithas ki parchhai hai

November 1, 2022

कविता-मुस्कान में मिठास की परछाई है मुस्कान में मिठास की परछाई है इस कला में अंधकारों में भी भरपूर खुशहाली

वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल /varno se shabdon ka bramjal

October 31, 2022

 वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल  वर्णों के भ्रमजाल से बने शब्द देख कलम संग दुनिया भटक ही जाती है तिलस्मी

PreviousNext

Leave a Comment