Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

सब कुछ आर्टिफिशियल!!!-किशन सनमुखदास भावनानी

सब कुछ आर्टिफिशियल!!! वर्तमान प्रौद्योगिकी युग में मानवीय बुद्धि सब कुछ आर्टिफिशियल बनाने के चक्कर में है!!! प्राकृतिक मौलिकता और …


सब कुछ आर्टिफिशियल!!!

सब कुछ आर्टिफिशियल!!!-किशन सनमुखदास भावनानी

वर्तमान प्रौद्योगिकी युग में मानवीय बुद्धि सब कुछ आर्टिफिशियल बनाने के चक्कर में है!!!

प्राकृतिक मौलिकता और मृत् देह में जान फ़ूकना बाकी रहा!!! जो मानवीय बुद्धि के लिए असंभव है!!! – एड किशन भावनानी गोंदिया –

वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी का अति तीव्रता से विकास हो रहा है। शास्त्रों, पौराणिक ग्रंथों और अनेक साहित्यों में ऐसा आया है कि, सृष्टि में उपस्थित 84 करोड़ योनियों में मानव योनि सबसे सर्वश्रेष्ठ और अलौकिक बौद्धिक क्षमता का अस्तित्व धारण किए हुए हैं!! साथियों यह बात हम अक्सर आध्यात्मिक प्रवचनों में भी सुनते हैं कि यह मानवीय चोला बड़ी मुश्किल से मिलता है और इसे सत्यकर्म में उपयोग कर अपना मानव जीवन सफल बनाएं। साथियों बात अगर हम मानव बौद्धिक संपदा की क्षमता की करें तो हमें व्यवहारिक रूप से इसका लोहा मानना ही पड़ेगा। बहुत से ऐसे काम हैं, जिन्हें पहले करने में जहां देर लगती थी, वही अब चुटकियों में हो जाते हैं, इसके लिए विज्ञान के द्वारा विकसित की गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धि, ए आई) को शुक्रिया कहा जा सकता है। हालांकि आज भी जिन कामों में बुद्धि के साथ विवेक की ज़रूरत होती है, वहां एआई पर भरोसा नहीं किया जाता। क्योंकि इस मानवीय बौद्धिक क्षमता ने ऐसे करतब दिखाए हैं और ऐसी ऐसी प्रौद्योगिकी, नवाचार, विज्ञान की उत्पत्ति की है जिसका हमारे पूर्वज, पीढ़ियों द्वारा सोचना भी अचंभित था!! याने हमारे पूर्वज सपने में भी नहीं सोचते होंगे कि मानव प्रौद्योगिकी, विज्ञान नवाचार में इतना आगे बढ़ जाएगा!पड़ोसी विस्तारवादी देश ने एक ऐसे ही विवेक भरे काम के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जज फॉर प्रॉसिक्यूशन का इस्तेमाल शुरू किया है, जिसके बारे में अब तक सोचा भी नहीं गया था। साथियों बात अगर हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बौद्धिकता) की करें तो हालांकि इस दौर में इसकी ज़रूरत है लेकिन अब इसका इस्तेमाल कुछ पारंपरिक कार्यो के लिए और प्राकृतिक मौलिकता में हाथ डालने के लिए किया जा रहे। एक टीवी चैनल के अनुसार, (1) विस्तारवादी देश ने दुनिया का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर प्रॉसिक्यूटर तैयार कर लिया है!! यह ऐसा मशीनी प्रॉसिक्यूटर है जो तर्कों और डिबेट के आधार पर अपराधियों की पहचान करेगा और जज के समान सजा की मांग करेगा। दावा किया जा रहा है कि यह मशीनी प्रॉसिक्यूटर 97 प्रतिशत तक सही तथ्य रखता है इस टेक्नोलॉजी के साथ ही एक नई डिबेट विश्व में शुरू हो गई है। चैनल के अनुसार, दावा किया गया है कि ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाला मशीनी जज वर्कलोड को कम करेगा और ज़रूरत पड़ने पर न्याय देने की प्रक्रिया में जजों को इससे रिप्लेस किया जा सकेगा। इसे डेस्कटॉप कम्प्यूटर के ज़रिये इस्तेमाल किया जा सकेगा और इसमें एक साथ अरबों आइटम्स का डेटा स्टोर किया जा सकेगा। इन सबका विश्लेषण करके ये अपना फैसला देने में सक्षम है।इसमें इस तरह के डाटा और सॉफ्टवेयर डाले गए हैं कि वह उन सभी परिस्थितियों को पढ़कर उसका फैसला देगा। यह तार्किक तौर पर बहुत मददगार सिद्ध होगा ऐसा मानना है। इसे विकसित करने में साल 2015 से 2020 तक के हज़ारों लीगल केसेज़ का इस्तेमाल किया गया था, ये खतरनाक ड्राइवर्स, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड और जुए के मामलों में सही फैसला दे सकता है। (2) एक टीवी चैनल के अनुसार विस्तार वादी देश ने जमीन का सूरज तैयार किया है जो इतनी तेज रोशनी 20 सेकंड में बाहर फेंकता है,विस्तारवादी देश की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2006 में की थी। उन्होंने कृत्रिम सूरज को एचएल-2 एम, नाम दिया है, इसे चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के साथ साउथवेस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है। प्रोजेक्ट का उद्देश्य प्रतिकूल मौसम में भी सोलर एनर्जी को बनाना भी है। परमाणु फ्यूजन की मदद से तैयार इस सूरज का नियंत्रण भी इसी व्यवस्था के जरिए होगा। चीन इस प्रोजेक्ट के जरिये 150 मिलियन यानि 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस का तापमान जेनरेट होगा। उनके के मुताबिक, यह असली सूरज की तुलना में दस गुना अधिक गर्म है। जैसा कि विस्तारवादी देश के प्रयोग में उत्पन्न हुआ है। बता दें कि असली सूर्य का तापमान 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस है।साथियों बात अगर हम, दूसरी अन्य मानवीय बुद्धि के कमाल की करें तो रोबोट मानव, चांद तक पहुंचना, चांद पर घर बनाना, एयर स्पेस में हाल ही में मानवीय टूरिज्म यात्राएं सहित अनेक अनहोनी प्रौद्योगिकी का उदय हुआ है!!! साथियों बात अगर हम मानवीय जीवन के प्राण की करें तो मेरा ऐसा मानना है कि चाहे कितनी भी लाख़ कोशिशें करें मानव बौद्धिक क्षमता इस हद तक विकसित नहीं हो सकती कि प्राकृतिक मौलिकता और मृत् देह में जान फूंक सके!!! क्योंकि बड़े बुजुर्गों का कहना है कि, गुरु सर्वगुण दे देता है, पर एक गुण अपने पास रखता है!! जो ब्रह्मास्त्र का काम करता है!! ताकि चेले में घमंड आने पर उससे भेदा जा सके!! ठीक उसी तरह कुदरत भी है! जीव में प्राण फूकना और प्राण निकालना यह मानवीय बुद्धि के बस की बात कभी नहीं होगी!!! अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि सब कुछ आर्टिफिशियल हो रहा है!!! वर्तमान प्रौद्योगिकी युग में मानवीय बुद्धि सब कुछ आर्टिफिशियल बनाने के चक्कर में है! जबकि प्राकृतिक मौलिकता और मृत देह में जान फूंकना बाकी रहा जो मानवीय बुद्धि के लिए असंभव है!!!

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

धर्मांधता का अजगर देश को निगल रहा है

April 25, 2022

“धर्मांधता का अजगर देश को निगल रहा है” सबको धर्म के प्रति खुद के विचार श्रेष्ठ लगते है। चाहे हिन्दु

मेहनत की मिसाल अख्तर आमिर

April 25, 2022

“मेहनत की मिसाल अख्तर आमिर” मेहनत की मिसाल IAS अधिकारी अख्तर आमिर खान वर्तमान समय में श्रीनगर में पोस्टेड हैं।

लहरों पे लहर

April 25, 2022

 लहरों पे लहर आज कल समाचारों में फिर से करोना का संकट गहरा रहा हैं।चीन के साथ साथ हांगकांग और

जल शक्ति अभियान– कैच-द-रेन 2022

April 25, 2022

 जल शक्ति अभियान– कैच-द-रेन 2022  दैनिक जीवन व पृथ्वी पर जल के महत्व को रेखांकित करने जल अभियान का विस्तार

समय का तकाज़ा

April 25, 2022

 समय का तकाज़ा  नई पीढ़ी के विचारों के साथ सामंजस्य बैठाना समय की मांग  बदलते आधुनिक परिपेक्ष में नई सकारात्मक

कविता -मेरा जीवन सुखी था

April 25, 2022

 कविता -मेरा जीवन सुखी था  मेरा जीवन सुखी था  जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे  मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता

Leave a Comment