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लहरों पे लहर

 लहरों पे लहर आज कल समाचारों में फिर से करोना का संकट गहरा रहा हैं।चीन के साथ साथ हांगकांग और …


 लहरों पे लहर

लहरों पे लहर

आज कल समाचारों में फिर से करोना का संकट गहरा रहा हैं।चीन के साथ साथ हांगकांग और यूरोपीय देशों में खूब फेल रहा हैं।और उसे नाम दिया गया हैं डेल्टा– क्रोन।इतनाबकेहर ढाने के बाद भी ये राक्षस को चैन नहीं हैं,वह न रुकता हैं और न ही ठहरता हैं और रूप बदलते बदलते कहर ढाता जा रहा हैं।

 लहर एक के बारे में देखें तो वह प्रारंभिक अवस्था थी जिस में बहुत ही बुरे दिन हमने जेलें हैं ये विष्णुओं की वजह से ,दिन नहीं साल बोलेंगे तो ही सही रहेगा। जब पहले चीन में  शुरुआत हुई तो वीडियो देख दिल तो दहल जाता था, किंतु ये नहीं सोचा था कि अपने देश या बोले तो दुनियां में भी ये इतना प्रभावी तरीके से फेल जायेगा।और जब आया तो ,पहली लहर जो मानसिक दबाव की ज्यादा थी क्योंकि उस वक्त जो वेरिएंट था वह उतना भी भयावह नहीं था जो दूसरी लहर वाला था।लेकिन बीमारी के लक्षणों से अपरिचित,दवाइयों या वेक्सीन का नहीं होना आदि से हम परेशान थे।अंधेरे में तीर चल रहे थे ,कोई कहता था मलेरिया की दवाई हाईडरोक्सी क्लोरोक्वीन असरदार हैं तो कुछ डॉक्टर्स पेट के कीड़े मारने वाली दवाइयां भी दे रहे थे।आयुर्वेद में भी  शरीर की रोग प्रतिकरक शक्ति को बढ़ाने के लिए भांति भांति के चूर्ण और घर घर में काढ़े बन रहे थे।उतने ही  व्हाट्स एप और दूसरे मध्यमों से  वीडियो और मैसेज आ रहे थे।घर से निकलना मुश्किल हो गया था।सोचते थे कि दरवाजे के बाहर खड़ा कोविड बाहर निकलते ही अपने को लग जायेगा।इसलिए सब कुछ ही घर पर ऑर्डर कर के मंगवाया जाता था। तब विदेशों की अति विषम परिस्थितियों से अपने देश में काफी ठीकठाक था, दुनियां में अपने देश में हुए वायरस के कंट्रोल के चर्चे हो रहे थे।पाश्चात्य के देशों में रोगियों की संख्या और उससे मरने वालों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि पूछो मत।देख सुन के प्रलय सा ही प्रतीत होता था।और एक समय आया कि लगा अपने देश में से तो नामोनिशान मिट गया हैं कोवीद का । लेकिन वह छलावा ही था। दूसरी लहर तो पहले से भी ज्यादा खतरनाक साबित हुईं।लाखों में  कैसिज थे और हजारों में मौत के आंकड़े पहुंच गए थे।अंतिम संस्कार करने के लिए लाइन लगी थी।उनको स्मशान या कब्रिस्तान में ले जाने के लिए कोई वाहन या सुविधा नहीं होने से लोग बाइक या रिक्शा या साइकिल का उपयोग करते दिखाए जा रहे थे,ये सब दिल को जकजोर के रख देता था।जिसने भी ये सब देखा सुना हैं वह आजीवन भूलेंगे नहीं ये प्रलयकारी  दृश्यों को।

 अभी भी दुनियां के कई देशों में ये कहर चल ही रहा हैं ये चिंता का विषय हैं। करोना के विषाणुं शरीर के डीएनए के साथ मिल नए नए वेरिएंट बनाते जा रहे हैं जैसे डेल्टा वायरस। ऐसे में  कम फैले  ऐसा करने की जरूरत होने की वजह से बिन लॉकडाउन के भी लोग घर में बंद हो गए। वहीं कोविड के नियमों तहत जरूरी,मास्क पहनना,बार बार हाथ धोना और दो गज की दूरी रखना जरूरी हैं।अब तो बहुत प्रकार की वेक्सीन उपलब्ध हैं जो कारगर भी हैं किंतु कब तक,अगर नए नए वेरिएंट्स निकलते ही गए और वेक्सीन ने काम करना कम कर दिया तो? ये भी बहुत बड़ा प्रश्न हैं।अपने देश में पिछले कुछ महीनों से बहुत ही कम केसेज आ रहे हैं लेकिन गफलत में रहने से दूसरी लहर सा हाल न हो ये खास जरूरी हैं।१२० करोड़ लोगों को लगी  वैक्सीन एक सुरक्षा चक्र के समान हैं लेकिन दूसरे देशों में आए नए वेरिएंट्स से अब कितनी सुरक्षा देती हैं ये भी एक अहम प्रश्न हैं।

 जैसे दक्षिण अफ्रीका ,हांगकांग, बोत्सवाना के नए वेरिएंट्स अपने देश में आने वाले प्रवासियों से फैल वापिस से केहर बरपा सकते हैं। दुनियां में कुल २६ करोड़ केसेज हुए है जिनमें से ५२ लाख जीतने मृत्यु हुए जो रिकॉर्डेड हैं किंतु उससे  काफी ज्यादा भी हो सकते हैं।दक्षिण अफ्रीका का नया वेरिएंट डेल्टा, जो दूसरी लहर में केहर  बारपा गया उससे भी ज्यादा खतरनाक हैं।इस वेरिएंट के उपर वैक्सीन का भी ज्यादा असर नहीं दिखाई देता हैं।इस वायरस के भी ३२ नए म्यूटेंट्स बन चुके हैं।ये वायरस जल्दी फैलता हैं और जानलेवा भी हैं।वैसे इसके अभी ज्यादा केसेज नहीं हैं लेकिन अगर फैला तो दुनियां के लिए खतरनाक परिस्थिति उत्पन्न होगी।

 दूसरे देशों में फ़ैल रहे कॉविड के आंकड़े अपने देश के लिए बहुत बड़ी चेतावनी हैं दूसरी लहर में भी यही हुआ था ,काम केसेज की वजह से हुई लापरवाही ने देश को कहां पहुंचा दिया था? दुनियां में बदनाम करके रख दिया था।

 स्वास्थ्य विभाग ने सभी राज्यों को विदेशी प्रवासियों के बारे में सचेत कर दिया हैं।शेर बाजार भी दुनियां में बढ़ रहे करोना के केसेज की वजह से गिरावट का आना भी आर्थिक संकट की निशानी हैं। अब साउथ अफ्रीका  से आया हैं नया ओमिक्रोन भी बहुत सारे म्यूटेशन होने की वजह से बहुत फैलता हैं।ये स्पाइक प्रोटींस ज्यादा होने की वजह से जल्दी फैलता हैं,अधिक संक्रमित करने वाला हैं।ये अधिक फैलने वाला वेरिएंट हैं जिसके कोई विशेष लक्षण नहीं देते हैं किंतु वह वैक्सीन लिए हुए लोगों को भी हो सकता हैं किंतु कितना घातक हैं इसके बारे में कुछ तय नहीं हो पाया हैं क्योंकि इस पर अभी ज्यादा रिसर्च नहीं हो पाई हैं। आज दुनियां के सभी देशों में प्रवेश कर चुका ये वेरिएंट के बारे में who भी चिंतित हैं और सभी प्रकार के करीना से बचने के लिए मापदंड को व्यवहार में लाने की सूचना दे चुका हैं।

और ये नया डेल्टाओमीक्रोन जिसका नामकरण हुआ है वह कहतें हैं कि डेल्टा जैसा घटक और ओमिक्रोन जैसे जल्दी फैलने वाला वेरिएंट हैं।अभी भी चीन में कई शहरों में ही नहीं, जिलों में भी फैल रहा ये वायरस लोगों को एक दूसरे के पास आने से भी डरा रहा हैं।चीन की सरकारों ने भी कोविड रिस्ट्रिक्शंस लगाएं हुए हैं।कईं शहरों से बाहर ट्रैवलिंग को भी बंद किया गया हैं।चीन में जीरो कोविद 19 पॉलिसी का अनुसरण हो रहा हैं तो भी ये रुकने का नाम नहीं ले रहा।इस बार तो ये वायरस कोल्ड स्टोरेज में काम कर रहें लोगों से और उनके संपर्क में आए लोगों से ही फैला हैं।कुछ छोटे छोटे जानवरों को भी पोजीटिव पाया गया हैं।वैसे ही हांगकांग में भी हालत दिख रहें हैं।हांगकांग तो बिजनेस हब हैं और बार बार लॉकडाऊन के हालत में बड़ी बड़ी कंपनिया अपने ऑफिस वहां से हटाके कई ओर स्थापित करने की सोच रहे हैं।वैसे सिंगापुर में परिस्थियां कुछ ठीक होने से रिस्ट्रिक्शन थोड़े कम किए हैं,ट्रैवल गाइड लाइंस में भी रिस्ट्रिक्शन हटा लिए हैं।यूरोप में भी हालातों पर नजर रखी जा रही हैं।अब तो पता नहीं ये लहरों का सिलसिला कब खत्म होगा।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


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