Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mamta_kushwaha, poem

शिक्षक(Teacher’s day special)

शिक्षक अज्ञानता को दूर कर हमसेज्ञान का जो पाठ पढ़ाये, वह कहलाते गुरु (शिक्षक) हमारेकरे क्या वर्णन आज, इकठ्ठा हुए …


शिक्षक

शिक्षक
अज्ञानता को दूर कर हमसे
ज्ञान का जो पाठ पढ़ाये,
वह कहलाते गुरु (शिक्षक) हमारे
करे क्या वर्णन आज,

इकठ्ठा हुए हमसब मनाने आज
“शिक्षक दिवस ” सम्मान में शिक्षक के,
अज्ञानता को दूर कर हमसे
ज्ञान का जो पाठ पढ़ाये,

करते है सादर नमन उन गुरुवर को
जो गढ़ते हमारा व्यक्तित्व कर शिक्षित हमें,
जो सिखाते हमें सही-गलत , अच्छा-बूरा ,
नैतिकता – अनैतिकता में भेद करना ,

अज्ञानता को दूर कर हमसे
जो गढ़ते हमारा उज्जवल भविष्य ,
बन पथप्रदर्शक रहे हमारे साथ
ऐसे गुरु श्रेष्ठ को सादर नमन ।

About author   

Mamta Kushwaha
ममता कुशवाहा

स्वरचित रचना
मुजफ्फरपुर, बिहार


Related Posts

ईर्ष्या तू ना गई – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

ईर्ष्या तू ना गई देखकर लोगों की सुख-सुविधा जल रही तू खूब जलन सेअपनी दुख की चिंता नहीं हैदूसरों के

कर्म महान है – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

कर्म महान है बच्चे भगवान हैं शिक्षा हमारी आधार हैगुणवत्तापूर्ण है विकल्प शत प्रतिशत लागू करना शिक्षकों का है संकल्पऐसा

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

PreviousNext

Leave a Comment