Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem, vyang

शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं | shaskeeye thappe wali vastuon ki heraferi karta hun

यह कविता अनाज सीमेंट इत्यादि शासकीय अलॉटमेंट वाली वस्तुओंं पर केंद्र या राज्य सरकार के ठप्पे लगे रहते हैं ।परंतु …


यह कविता अनाज सीमेंट इत्यादि शासकीय अलॉटमेंट वाली वस्तुओंं पर केंद्र या राज्य सरकार के ठप्पे लगे रहते हैं ।परंतु हमें मार्केट में ब्लैक में बिकती हुई दिख जाती है।कई बार पकड़ी भी जाती है। मिलीभगत पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष पर आधारित है 

व्यंग्य कविता–शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं

शासन द्वारा अलॉटमेंट वस्तुओं पर नज़र रखता हूं
योजनाओं से हड़पकर बाजार में भेजता हूं
मिलीभगत से माल बाहर निकलवाता हूं
शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं

अनाज सीमेंट सभी पर नज़र रखता हूं
नीचे से ऊपर तक बात कर लेता हूं
चुपके से बाजार में पहुंचा देता हूं
शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं

निजी कंस्ट्रक्शन में ठप्पे वाला सीमेंट देता हूं
पांच किलो योजना को भी नहीं छोड़ता हूं
घपले को अनदेखा करनें छुट्टी पर चला जाता हूं
शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं

कंप्लेंट करने वाले को उल्टा फंसता हूं
ऑफिस में गाली गलौज का आरोप लगाता हूं
जांच रिपोर्ट अपने पक्ष में करवाता हूं
शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं

मिलीभगत चैन को पूरा खुश रखता हूं
हरे गुलाबी की बारिश करता हूं
हर साल फ्लैट प्लॉट की रजिस्ट्री करता हूं
शासकीय ठप्पे वाली वस्तुओं की हेराफेरी करता हूं

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

 


Related Posts

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

Leave a Comment