Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, vyang

व्यंग -सफर?

 व्यंग -सफर? मेरी चचेरी बहन की  उत्तर क्रिया में से लौट रही थी राज्य परिवहन की बस में नहीं आई …


 व्यंग -सफर?

मेरी चचेरी बहन की  उत्तर क्रिया में से लौट रही थी राज्य परिवहन की बस में नहीं आई कि उसमे मुसाफिर कुछ अविनयी होते हैं तो प्राइवेट परिवहन की टिकिट ले ली।इस परिवहन वालों का नियम था कि महिला के साथ महिला को ही बिठाएंगे वरना जगह खाली रहेगी। सुबह का समय था कोई अकेली महिला तो मुसफरी नहीं कर रही होगी ऐसा सोच, मैं प्रार्थना कर रही थी की पूरी सीट पर मेरा ही राज्य हो कोई नहीं आएं तो आराम से फैल कर बैठ के आऊंगी।मेरी इच्छा के विपरीत आई एक महिला,मैं फैल के तो क्या सिकुड़के भी नहीं बैठ पाऊं इतनी फैली हुई।

  उसकी टिकट खिड़की वाली सीट की थी तो उसे मेरे पांव पर पांव रख कर चलने का हक़ मिल गया हो वैसे ही पैर का मलीदा बनाते हुए निकल अपनी सीट पर जाके बैठी।बस चल पड़ी और उसे तो जुटें लगने लगे शायद बस और बस के ए. सी. की आवाज़ें लॉरी का काम कर रही थी,मधुर खर्राटों की आवाज आनी शुरू हो गई।और मेरी बैठने की जगह पर भी अतिक्रमण शुरू हो गया।कोहनी मेरी कमर पर प्रहार करने लगे और सर मेरे कंधों पर  आसन ढूंढने लगा था।ये जुल्म 2 घंटों तक सहा और हाल्ट आया तो आगे जा कर कंडक्टर साब से बिनती की कि मेरी जगह बदल दें तो अच्छा रहेगा।लेकिन कोई जगह नहीं होने से इच्छा नहीं होते हुए भी वहीं बैठना पड़ा।शायद कंडक्टर साब ने कुछ सूचना दी होगी, शायद तो कुछ समोसे खा कर ज्यादा ऊर्जा की स्वामिनी बन आई थी वह हथनी ।चिंघाड़ कर आती हो वैसे कसमसाती हुई अपनी दोनों कुहनियों को हथियारों की तरह हिलाती सीट की और आ रही थी और बोलती हुई , “अपना बैग हटा के रखा करों,हमे पैरों में चुभता हैं। “मैने हथियार डाल दिए और वह छोटी कुंभकर्णी फिर से अपने नथूनों से आवाज़ें निकलती हूई अपनी पाशविक निद्रा का आनंद लेने लगी और मै सीट के छोर पर बैठ बस की हर  हलन चलन के साथ ताल मिलाती अपने शहर जल्दी पहुंचने की प्रार्थना के साथ अपने सफर का आनंद(???) लेती रही।

About Author

जयश्री बिरमी सेवानिवृत शिक्षिका  अहमदाबाद

जयश्री बिरमी

सेवानिवृत शिक्षिका 
अहमदाबाद

Related Posts

तुलसी आज| Tulsi-aaj

March 28, 2023

तुलसी आज क्यों में तुलसी तेरे आंगन की बनूंमेरी अपनी महत्ता मैं ही तो जानूं संग तेरे रहूंगी जीवन भर

कितनी विभिन्नता में एकता

March 19, 2023

कितनी विभिन्नता में एकता कश्मीर से कन्या कुमारी तक विविधता से भरा अपना देश है।सुंदर स्वर्ग सा कश्मीर जहां हूर

आधुनिकता वरदान या अभिशाप

March 5, 2023

 आधुनिकता वरदान या अभिशाप प्रगति सब ही क्षेत्र में आवकारदाय है।प्रहलें हम पैदल या बैल गाड़ियों,घोड़ा गाड़ियों आदि में प्रवास

बच्चो की बदलती मानसिकता

March 5, 2023

बच्चो की बदलती मानसिकता ये मेरा अपना अभिप्राय है जो इतने साल गृहस्थी चलाने से और शिक्षण कार्य के दौरान

धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं

March 4, 2023

भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव धर्म और जाति की आड़ में छिपता हूं आज के बढ़ते ट्रेंड की ओर बढ़ रहा

शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं

March 4, 2023

 भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव शासन से बेवफाई का अंजाम भुगत रहा हूं पद और कुर्सी से बेवफाई किया हूं मैंने

Leave a Comment